मनोरंजन
19-Apr-2026
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मुंबई (ईएमएस)। 90 के दशक में छोटे परदे के लोकप्रिय धारावाहिक शांति से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेती मंदिरा बेदी आज उन चुनिंदा हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने हर दौर में चुनौती का डटकर सामना किया। चाहे वह 90 के दशक का टीवी हो, क्रिकेट की दुनिया में एंकरिंग का नया दौर हो या फैशन के चमकते मंच, मंदिरा ने हर जगह अपनी एक खास पहचान बनाई। एक ऐसा समय भी आया, जब उन्हें तीखी आलोचना और सार्वजनिक निंदा का सामना करना पड़ा। लेकिन, मंदिरा इन सब के आगे एक चट्टान की तरह खड़ी रहीं और अपने संकल्प से पीछे नहीं हटीं। मंदिरा बेदी हाल ही में 15 अप्रैल को जन्मदिन मनाया। बचपन से ही उन्हें अभिनय और रचनात्मक कलाओं में गहरी दिलचस्पी थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। 90 के दशक में प्रसारित हुए बेहद लोकप्रिय धारावाहिक शांति ने उन्हें रातों-रात एक बड़ा नाम बना दिया। इस शो में एक आत्मनिर्भर और सशक्त महिला का उनका चित्रण इतना प्रभावशाली था कि वे घर-घर में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गईं, और आज भी उन्हें उनके इस किरदार के लिए याद किया जाता है। इसके बाद उन्होंने कई अन्य टीवी शोज में काम किया और धीरे-धीरे फिल्म तथा होस्टिंग की दुनिया में भी अपनी जगह बनाई। लेकिन उनके करियर में असली मोड़ तब आया, जब उन्हें क्रिकेट जैसे खेल में प्रेजेंटर बनने का अवसर मिला। साल 2003 में आईसीसी वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स एंकरिंग शुरू की, जो उस समय भारतीय टेलीविजन के लिए एक अभूतपूर्व प्रयोग था, क्योंकि उस समय खेल कमेंट्री और प्रस्तुति में महिलाओं की उपस्थिति बेहद दुर्लभ थी। यहीं से उनका करियर एक नए स्तर पर पहुंचा, लेकिन इसी दौर में उन्हें ज़बरदस्त आलोचना का सामना भी करना पड़ा। सबसे खास बात यह थी कि यह ट्रोलिंग सोशल मीडिया के बिना भी होती थी, जो प्रिंट मीडिया और सार्वजनिक बहसों के माध्यम से उन पर हावी होने की कोशिश करती थी। उदाहरण के तौर पर, 2003 वर्ल्ड कप के दौरान कई लोगों ने उनके कपड़ों और स्टाइलिश अंदाज पर सवाल उठाए। यह तर्क दिया गया कि वह क्रिकेट जैसे गंभीर खेल को अनावश्यक रूप से ग्लैमरस बना रही हैं, जिससे खेल की शुचिता और गरिमा प्रभावित हो रही है। इसी तरह, 2007 वर्ल्ड कप में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब उनकी एक साड़ी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इस साड़ी पर अलग-अलग देशों के झंडों का डिजाइन बना हुआ था, जिसे लेकर काफी आलोचना हुई और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी। यह घटना उस समय मीडिया में खूब चर्चा में रही और मंदिरा को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद, मंदिरा बेदी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मानसिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए, उन सभी नकारात्मक टिप्पणियों के आगे एक चट्टान की तरह खड़ी रहीं और अपने काम पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित किया। सुदामा/ईएमएस 19 अप्रैल 2026