राष्ट्रीय
20-Apr-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में एलपीजी-पेट्रोल संकट जैसी सुर्खियों के बीच भी जिस मुद्दे ने जनता के दिमाग में जगह बनाई, वहां मुददा महिला आरक्षण बिल को लेकर था। सड़क से लेकर संसद तक इसपर जमकर चर्चा हुई। अब सवाल है कि आधी आबादी करार दिए गए वर्ग को राजनीतिक मजबूती देने में कितने प्रयास किए गए हैं? क्या चुनावी टिकटों के बंटवारे में भी महिलाओं का वहीं दबदबा दिखा जो भाषणों और घोषणापत्रों में नजर आता है? दरअसल असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी इस बार चुनावी दौर से गुजर रहे हैं। इसमें से असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान हो चुका है और अन्य 2 राज्यों में बाकी है। ईसीई यानी भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी कार्यक्रम के अनुसार 4 मई को नतीजों का ऐलान होगा। केरल में जहां 140 सीटों पर चुनाव हो रहा है। वहां मुख्य मुकाबल लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच माना जा रहा है। 863 में से यहां 771 पुरुष उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि, महिला प्रत्याशियों की संख्या 92 या 11 प्रतिशत ही है। आईयूएलएल यानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विधानसभा चुनाव में पहली बार एक साथ दो महिलाओं को उतारा है। इससे पहले, आईयूएमएल ने 1996 और 2021 के चुनावों में एक-एक महिला को टिकट दिया था। कुल (केरल): 863 पुरुष 771, महिला 92 पार्टी अनुसार: भाजपा ने 93 में से पुरुष को 80 और 13 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस ने 85 सीटों में से पुरुष को 78 और महिला को 7 सीट दी। सीपीएम (सीपीएम) ने 77 सीटों में से पुरुष को 65 और महिला को 12 उतारा। सीपीआई ने 24 सीटों पर 19 पर पुरष और महिला को 5 सीटे दी। दक्षिण भारतीय राज्य में फिलहाल डीएमके यानी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम की अगुवाई वाली सरकार है। राज्य में इस बार कुल 4023 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें से कुल 3992 विश्लेषण किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि इसमें से 442 महिलाओं को टिकट दिया गया हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 के चुनाव में कुल 3,859 उम्मीदवारों में से 407 महिलाएं थीं, जबकि 2016 में 2,295 उम्मीदवारों में से केवल 214 महिलाएं थीं। इससे महिला भागीदारी में धीरे-धीरे वृद्धि का संकेत मिलता है। डीएमके 175 सीटों में से पुरुष को 156 और महिलाओं को 19 सीटें दी। एआईएडीएमके ने 170 में से पुरुष को 149 और महिला को 121 भाजपा ने 33 में से पुरुष को 27 और महिलाओं को 6 टिकट दिए। कांग्रेस ने 28सीटों में से पुरुष को 26 और दो महिलाओं को उतारा। भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में मतदान हो चुके हैं। यहां कुल 722 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिसमें से महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 8 फीसदी ही रही। राज्य में सभी पार्टियों ने मिलाकर कुल 60 महिलाओं को टिकट दिए थे। खास बात है कि असम की मतदाता सूचियों में महिलाओं की संख्या 49.98 प्रतिशत है। भाजपा ने 90 में से सीटों पर पुरुष 8 और 6 सीटों पर महिलाओं को उतारा। कांग्रेस ने 99 सीटों में से पुरुष: 86 और महिला: 13 आम आदमी पार्टी (आप): 18 सीटों में से पुरुष: 15, महिला: 3 तृणमूल कांग्रेस ने 22 में से पुरुष: 19 और महिला: 3 एसयूसीआई(सी): 41 में से पुरुष: 29, महिला: 12 पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 40 महिलाएं चुनाव लड़ रहीं हैं। हालांकि, कुल उम्मीदवारों के लिहाज से यह संख्या सिर्फ 14 प्रतिशत ही है। अलग-अलग दलों ने यहां 251 पुरुष उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। एनटीके (एनटीके) 28 सीटों में से पुरुष: 14 महिला: 14 टीवीके ने 28 में से पुरुष: 26 महिला: 2 पीएमके ने 19 सीटों में से पुरुष: 17 और महिला: 2 पश्चिम बंगाल (कुल सीटें- 294) वहीं मां माटी मानुष का ही नारा था, इस नारे ने ही राज्य में ममता बनर्जी को स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषणों में कहा भी जाता है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस समर्थक वर्ग में महिलाओं की खासी हिस्सेदारी है। राज्य की 291 सीटों पर चुनाव लड़ रहे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 52 सीटों पर महिलाओं को मौका दिया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस 35 उम्मीदवार और तीसरे पर 34 महिला प्रत्याशियों के साथ लेफ्ट है। लेफ्ट दल 253 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, भाजपा ने 33 महिलाओं को मैदान में उतारा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। आशीष दुबे / 20 अप्रैल 2026