राष्ट्रीय
20-Apr-2026


लखनऊ (ईएमएस)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नागरिकता के मामले में सुनवाई के बीच जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने मामले से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी के मामले से अलग होने का फैसला ऐसे वक्त में आया है जब मामले में याची विग्नेश शिशिर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अलग-अलग पोस्ट्स में कोर्ट पर एकतरफा होने का आरोप लगाया। पिछले दिनों इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात शुरू हुई थी। इसके बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने अगली तारीख तय कर दी थी। इससे याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की सोशल मीडिया पोस्ट पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करती हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुनवाई के बीच जस्टिस विद्यार्थी ने मामले से खुद को अलग कर लिया और केस को आगे की कार्रवाई के लिए दूसरी पीठ के पास भेज दिया। मामले की सुनवाई के दौरान आवेदक शिशिर ने अदालत से अनुरोध किया कि इस केस को दो दिन बाद लिया जाए, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला सूचीबद्ध हो, तभी अपनी बात रखें। बाद में शिशिर ने अपनी दलीलें रखने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अब उनकी दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। आदेश पारित करते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट किए हैं जिनमें कोर्ट पर ‘गड़बड़ी’ के आरोप लगाए गए हैं और यह अदालत की छवि को धूमिल करने वाला है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि एक अन्य पोस्ट में उन्होंने आम लोगों से अपील की थी कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश देने को कहें कि आदेश की टाइप कॉपी खुले कोर्ट में पढ़ी जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे पोस्ट कोर्ट पर कीचड़ उछालने जैसे हैं और यह भी देखा गया कि शिशिर जनता से यह राय मांग रहे थे कि क्या उन्हें इसी पीठ के सामने मामला जारी रखना चाहिए, जिससे कोर्ट की गरिमा प्रभावित हुई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने खुद को मामले से अलग कर लिया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस मामले में वकील, जिनमें राज्य सरकार के वकील और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल भी शामिल हैं, सही कानून और संबंधित केस लॉ अदालत के सामने रखने में विफल रहे। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के खिलाफ बोलना कैसे उचित हो सकता है और शिशिर ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया है, साथ ही मीडिया में दिए गए उनके बयान भी आपत्तिजनक हैं। सरकार के वकील और डिप्टी एसजीआई ने भी कहा कि आवेदक के सोशल मीडिया पोस्ट का बचाव नहीं किया जा सकता। सुनवाई के अंत में शिशिर ने कहा कि उन्होंने पहले कोर्ट के आदेश की सोशल मीडिया पर सराहना भी की थी, लेकिन आज का आदेश एकतरफा है। इस पर जस्टिस विद्यर्थी ने कहा कि वे उनके आदेश को चुनौती दे सकते हैं। शिशिर ने जवाब दिया कि वे चुनौती देने नहीं आए हैं, बल्कि उनके अन्य पोस्ट भी देखे जाएं। इस पर जज ने टिप्पणी की कि इन सब वजहों से उन्हें खेद हुआ है और यह अनुचित है। जितेन्द्र 20 अप्रैल 2026