राज्य
20-Apr-2026
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:: एकात्म पर्व में बोले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल- आदि गुरु ने स्थापित की देश की मानक संचालन प्रक्रिया :: ओंकारेश्वर/इंदौर (ईएमएस)। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य के प्रकटोत्सव एकात्म पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद सत्र में भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरामन ने जगद्गुरु के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को न केवल व्यवस्थित किया, बल्कि उन्हें एक अखंड धारा के रूप में प्रवाहित भी किया। श्री वेंकटरामन ने मंदिर परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शंकराचार्य ने स्थानों की उपयोगिता के अनुसार मंदिर व्यवस्था विकसित की। उन्होंने ऐसी पूजा-पद्धतियाँ स्थापित कीं, जो आज भी पूरे देश में समान रूप से प्रचलित हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती और तिरुपति बालाजी की सुप्रभात सेवा इसका जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने इसे भारत की प्राचीन “स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर” (मानक संचालन प्रक्रिया) बताया, जो सदियों से अक्षुण्ण बनी हुई है। :: अद्वैत वाद नहीं, निर्विवाद सत्य : स्वामिनी विमलानंद ‘चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक यात्रा’ सत्र में कोयम्बटूर की स्वामिनी विमलानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अद्वैत की समृद्ध परंपरा स्थापित की और स्वामी चिन्मयानंद ने उसे जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अद्वैत कोई वाद नहीं है, क्योंकि वाद का प्रतिवाद होता है, जबकि अद्वैत एक निर्विवाद सत्य है। स्वामी अद्वैतानंद ने भारत को ‘ऋषि प्रधान देश’ बताते हुए चिन्मय मिशन के सेवा कार्यों पर प्रकाश डाला। वहीं, स्वामी वेदतत्त्वानंद ने चिन्मयानंद के व्यक्तित्व में नचिकेता की प्रश्नशील बुद्धि के दर्शन कराए। :: शंकरदूतों का हुआ सम्मान :: कार्यक्रम के दौरान अद्वैत वेदांत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ‘शंकरदूतों’ को सम्मानित किया गया। यह सम्मान जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर चयनित श्रेष्ठ प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण भी हुआ। :: समापन आज : 700 युवा लेंगे शंकरदूत दीक्षा :: एकात्म पर्व का समापन आज प्रातः 10 बजे अलंकरण समारोह के साथ होगा। इस गरिमामय अवसर पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी और जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। समापन अवसर पर देश-विदेश के 700 से अधिक युवा नर्मदा तट (अभय घाट) पर शंकरदूत के रूप में दीक्षा ग्रहण करेंगे। प्रकाश/20 अप्रैल 2026