राज्य
21-Apr-2026
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भोपाल (ईएमएस)। पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) से ठीक पहले राजधानी भोपाल में एक अनोखा और आकर्षक जनजागरूकता अभियान देखने को मिला। पेटा इंडिया और Animals With Humanity (AWH) के समर्थकों ने हवा से फूलने वाले डायनासोर कॉस्ट्यूम पहनकर शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा और पर्यावरण संरक्षण के लिए वीगन जीवनशैली अपनाने की अपील की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे संदेश लिखे पोस्टर थे, जिनमें लोगों से कहा गया—“यह 2026 है: अब बदलने का समय है! वीगन बनें!” और “मांस खाना पुरातन सोच है: वीगन बनें।” इस अनोखे प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि मांस, अंडे और डेयरी उत्पादों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पशु-आधारित खाद्य उत्पादन से न केवल ग्रीनहाउस गैसों का बड़ा उत्सर्जन होता है, बल्कि यह जल प्रदूषण, समुद्री ‘डेड ज़ोन’, और प्राकृतिक आवासों के विनाश का भी प्रमुख कारण है। इसके साथ ही, दुनिया के ताज़े पानी के संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा भी इसी उद्योग में खर्च होता है। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध में यह सामने आया है कि यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह से वीगन डाइट अपनाता है, तो वह अपने भोजन से जुड़े कार्बन फुटप्रिंट को लगभग 73 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इस लिहाज़ से, यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक माना जा रहा है। अभियान के दौरान पशु कल्याण पर भी जोर दिया गया। संगठनों ने बताया कि अंडा और डेयरी उद्योग में जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। मुर्गियों को छोटे-छोटे पिंजरों में बंद रखा जाता है, जबकि कई पशुओं को परिवहन के दौरान ही गंभीर चोटें लग जाती हैं। वहीं, मछलियों और अन्य जीवों के साथ भी क्रूर व्यवहार के उदाहरण सामने आते हैं। जानकारी के अनुसार, एक वीगन व्यक्ति हर साल करीब 200 जानवरों की जान बचाने में योगदान दे सकता है। इसके अलावा, वीगन आहार अपनाने से दिल की बीमारी, डायबिटीज़ और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी यह बात कही गई है कि जलवायु संकट के प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन भोजन की ओर बढ़ना आवश्यक है। पेटा इंडिया ने इस अवसर पर लोगों को मुफ्त वीगन स्टार्टर किट उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी, ताकि इच्छुक लोग आसानी से इस जीवनशैली को अपना सकें। यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि पशु अधिकार और मानव स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। ईएमएस, 21 अप्रैल, 2026