अंतर्राष्ट्रीय
21-Apr-2026


-अघोषित नाकाबंदी का विरोध तेज, लोग उतरे सडक़ों पर, सीमा शुल्क सख्ती के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन काठमांडु/नई दिल्ली(ईएमएस)। जेन जी आंदोलन से उभरे बालेन शाह और रवि लामीछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सत्ता में आने के बाद कई बदलाव देखने को मिले हैं। नेपाल सरकार अब भारत-नेपाल सीमा पर सख्त रुख अपना रही है। भारत से नेपाल जाने वालों और सामान ले जाने वालों पर कस्टम नियम लागू किए गए हैं। नियमों के अनुसार, 100 रुपये से अधिक का सामान लेकर नेपाल में प्रवेश करने पर कस्टम शुल्क देना अनिवार्य होगा। शुल्क न देने की स्थिति में सामान जब्त कर लिया जाएगा। इस वजह से भारत-नेपाल सीमा पर तैनात नेपाली सुरक्षा अधिकारियों और कर्मियों के साथ आए दिन कहासुनी होती रहती है। कस्टम नियमों के लागू होने से दोनों देशों के संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नेपाल में नई आर्थिक सख्ती को लेकर विरोध तेज हो गया है। बालेन शाह के नेतृत्व में लागू की जा रही कस्टम नियमों की सख्त व्यवस्था के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (करीब 63 भारतीय रुपये) से अधिक मूल्य के सामान पर 80 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी सख्ती से लागू करना शुरू किया है। हालांकि यह नियम नया नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में इसके कड़ाई से पालन ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्षी दलों ने इस फैसले को अघोषित नाकाबंदी करार दिया है। नेपाली कांग्रेस ने सरकार से इस नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की है, इसे जन-विरोधी बताते हुए कहा कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कम आय वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। वर्षों से नेपाल के लोग दैनिक जरूरतों जैसे राशन, दवाएं, कपड़े और अन्य सामान की खरीदारी के लिए भारत आते रहे हैं। इससे दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता था। लेकिन अब 5 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक की ड्यूटी के कारण लोगों की खरीदारी आदतों में बदलाव देखने को मिल रहा है। सीधा असर भारतीय व्यापारियों पर भी इस फैसले का असर सीमावर्ती इलाकों में साफ दिख रहा है। धारचूला से लेकर दार्जिलिंग तक बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है। इसका सीधा असर भारतीय व्यापारियों पर भी पड़ा है, जिनकी बिक्री में कमी दर्ज की जा रही है। लोगों का कहना है कि हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों को अपेक्षाकृत राहत मिलती है, जबकि जमीनी सीमा पर नियम बेहद सख्त हैं। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी लाउडस्पीकर के जरिए यह स्पष्ट कर रहे हैं कि किसी भी नागरिक चाहे वह आम व्यक्ति हो या सरकारी कर्मचारी किसी को नियमों में छूट नहीं दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह कदम अवैध आयात और राजस्व चोरी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर बढ़ते विरोध और आर्थिक असर को देखते हुए इस नीति पर बहस तेज हो गई है। सीमा पर चौतरफा विरोध और राजनीतिक दबाव गौरतलब है कि सरकार ने राजस्व चोरी रोकने और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भन्सार महसुल अधिनियम 2081 के तहत, पिछले साल से कागजों में मौजूद इस नियम को अब सख्ती से लागू किया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसका व्यापक विरोध हो रहा है। नेपाली कांग्रेस ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई है। जनता समाजवादी पार्टी के संरक्षक महन्थ ठाकुर ने एक विज्ञप्ति जारी कर इस नीति को नेपाल-भारत के बीच ऐतिहासिक आर्थिक और सामाजिक संबंधों पर प्रहार बताया है, और पुरानी सहज व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। वहीं, राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष विनय यादव ने इस प्रशासनिक कड़ाई को 1950 की शांति एवं मैत्री संधि के भावनाओं के खिलाफ बताया है, जिससे पर्यटक, मरीज और आम नागरिक हतोत्साहित हो रहे हैं। लायन्स क्लब ऑफ पोखरिया के अध्यक्ष नेजामुद्दीन शमानी ने भी 100 रुपये जैसे मामूली मूल्य पर टैक्स वसूली को नागरिकों के लिए मानसिक प्रताडऩा करार दिया है। विरोध का स्वर केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, सत्ता पक्ष के राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसदों ने भी प्रधानमंत्री बालेन शाह और गृह मंत्री सुधन गुरुंग से मिलकर इस अव्यवहारिक नीति पर पुनर्विचार करने का दबाव बनाया है। विनोद उपाध्याय / 21 अप्रैल, 2026