क्षेत्रीय
22-Apr-2026
...


- नपाध्यक्ष बोलीं- अधिकारियों की लापरवाही से परिषद की हो रही बदनामी - नपाध्यक्ष ने कलेक्टर और सीएमओ को चेताया, वार्डों में बढ़ रहा जनता का आक्रोश। गुना (ईएमएस)। नगर पालिका परिषद गुना में विकास कार्यों की कछुआ चाल और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शहर के सभी 37 वार्डों में होने वाले 60 निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति मिलने के बावजूद निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित नहीं करने पर उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर गहरी नाराजगी जताई है। - सिंधिया के हस्तक्षेप और 9 माह के इंतजार के बाद मिली थी स्वीकृति नपाध्यक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि शहर के विकास से जुड़े इन 60 निर्माण कार्यों की वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति पीआईसी द्वारा लगभग 9 माह पहले ही दे दी गई थी। इस मामले में हो रही देरी को देखते हुए नपाध्यक्ष ने स्वयं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। श्रीमंत सिंधिया के संज्ञान लेने और पत्राचार के बाद आखिरकार 06 अप्रैल 2026 को कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं आवास विकास ग्वालियर द्वारा इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई। - भाजपा की परिषद की हो रही बदनामी श्रीमती सविता गुप्ता ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तकनीकी स्वीकृति मिले हुए भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन उपयंत्रियों द्वारा बार-बार मौखिक निर्देश देने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण शहर वासियों और पार्षदों में भारी आक्रोश है। इससे भारतीय जनता पार्टी की नगर पालिका परिषद की छवि धूमिल हो रही है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। - 6 माह पहले निरस्त किए टेंडरों का दिया हवाला अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए याद दिलाया कि 6 माह पूर्व इन्हीं टेंडरों को केवल इसलिए निरस्त कर दिया गया था क्योंकि तब तक तकनीकी स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई थी। अब जब स्वीकृति मिल चुकी है, तो टेंडर जारी करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सीएमओ को निर्देशित किया है कि शीघ्र ही सभी 37 वार्डों के टेंडर जारी करने हेतु प्रकरण की नस्तियां (फाइलें) उनके समक्ष प्रस्तुत की जाएं, ताकि शहर के लंबित विकास कार्यों को गति मिल सके। नपाध्यक्ष ने इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर को भी भेजी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हडक़ंप मच गया है। - सीताराम नाटानी