वाराणसी (ईएमएस)। कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल के मरीजों के लिए रक्त और प्लाज्मा दान किया। इस सराहनीय पहल में बीएससी एग्रीकल्चर यूजी के छात्र वीर कुमार, आयुष हीरा, महेंद्र, प्रिंस कुमार,भूपेंद्र और श्वेताभ शामिल रहे। इन छात्रों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद कैंसर मरीजों की सहायता की और समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई। कैंसर के उपचार के दौरान कई मरीजों को नियमित रूप से रक्त और प्लाज्मा की आवश्यकता होती है। एक व्यक्ति के प्लाज्मा से दो बच्चों की जान बचाई जा सकती है। बहुत सारे बच्चे इसके आभाव में अपनी जिंदगी खो बैठते है जो कि प्लाज्मा के उपलब्धता से बचाई जा सकती थी । ऐसे में इन छात्रों का यह योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है और समाज के लोगो को भी इसमें अपनी भागीदारी दिखानी चाहिए। छात्रों ने बताया कि वे भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहेंगे और अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। यह पहल कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. यू. पी. सिंह के प्रेरणा अंतर्गत वाराणसी हेल्प ग्रुप द्वारा आयोजित किया गया था जिसमें डिपार्टमेंट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ तरुन वर्मा, वाराणसी हेल्प ग्रुप के तरफ से हिमांशु गुप्ता और टाटा कैंसर अस्पताल की कर्मचारी खुशबु कुमारी ने बच्चों कों लगातार प्रोत्साहित किया। यह न केवल मानवीय मूल्यों को दर्शाती है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। यह पुनीत कार्य पंडित मदन मोहन मालवीय जी के उन उच्च आदर्शों और विचारों को साकार करता है, जिनमें शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रखकर उसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना भी इसी उद्देश्य से हुई थी कि यहाँ के विद्यार्थी “सेवा, त्याग और समर्पण” के मूल मंत्र को अपने जीवन में आत्मसात करें। आज के इस मानवीय प्रयास के माध्यम से छात्रों ने विश्वविद्यालय के मूलमंत्र “विद्या धर्मेण शोभते” को चरितार्थ करते हुए यह सिद्ध किया है कि सच्ची शिक्षा वही है जो समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। यह पहल न केवल वर्तमान समय की सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप है, बल्कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना को भी मजबूती प्रदान करती है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। डॉ नरसिंह राम, 21 अप्रैल, 2026