22-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को मौत की सजा देने की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली है। अब मामले में 21 जुलाई को सुनवाई होगी। दिल्ली हाईकोर्ट में मलिक की ओर से दाखिल जवाब पर एनआईए ने भी अपना जवाब दाखिल किया। साथ ही कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में चल रहे सबरीमाला मामले में व्यस्त हैं, इसकारण सुनवाई टाल दी जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 21 जुलाई तय कर एनआईए के जवाब की कॉपी यासीन मलिक को देने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि कि पूरा मामला 2017 के टेरर फंडिंग केस से जुड़ा है, इसमें मलिक पर हवाला, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से फंडिंग और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के आरोप हैं। मलिक को पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने 24 मई 2022 को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद एनआईए ने 2023 में फैसले को चुनौती दी थी। एनआईए ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मलिक को मौत की सजा देने की मांग की है। एनआईए का दावा है कि मलिक ने 1990 के दशक में कई हत्याओं और अपहरणों में भूमिका निभाई, जिसमें वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या भी शामिल है। जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देकर कहा कि इसतरह के मामले रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में आते हैं और मलिक को मौत की सजा मिलनी चाहिए। वहीं, अलगाववादी नेता मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि 1990 के बाद से केंद्र में सत्ता में रही छह सरकारों ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए मुझसे बात की थी। इसमें वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, पी.वी. नरसिम्हा राव, एच.डी. देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकारें शामिल हैं। आशीष दुबे / 22 अप्रैल 2026