लखनऊ,(ईएमएस)। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और पूर्व सीएम मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी का रुख एक बार फिर स्पष्ट कर कार्यकर्ताओं को किसी भी प्रकार के भ्रम से बचने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि 15 अप्रैल 2026 को पार्टी द्वारा जो आधिकारिक स्टैंड तय किया गया था, वहीं अब भी लागू है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने संगठन को मजबूत करने, जनाधार बढ़ाने और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया। मायावती ने पोस्ट के जरिए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पार्टी की नीतियों और दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी और निष्ठा से पालन करें। उन्होंने बताया कि वह पार्टी कार्यों के सिलसिले में दिल्ली जा रही हैं और जल्द ही वापस लौटेंगी, लेकिन इस दौरान संगठनात्मक कार्यों में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 31 मार्च 2026 को लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक का जिक्र कर कहा कि उसमें संगठन को मजबूत करने, कैडर के जरिए जनाधार बढ़ाने और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के जो निर्देश दिए गए थे, उन पर लगातार काम किया जाना चाहिए। इसके अलावा 22 फरवरी को आयोजित ऑल-इंडिया स्तर की बैठक में दिए गए निर्देशों को भी समयबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया। मायावती ने कहा कि वे जनता के बीच जाकर बीएसपी सरकार के दौरान किए गए विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की जानकारी दें। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बने कई एक्सप्रेस-वे और नोएडा में विकसित हो रहे जेवर एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं की रूपरेखा बीएसपी सरकार के दौरान ही तैयार की गई थी। उनका आरोप था कि तब केंद्र में रही कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण इन योजनाओं को पूरा होने में बाधाएं आईं।: उन्होंने ‘कानून द्वारा कानून का राज’ और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की विचारधारा पर कहा कि उतर प्रदेश के समग्र विकास, बेहतर कानून व्यवस्था और सभी वर्गों की उन्नति के लिए बीएसपी का शासन मॉडल ही सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इन मुद्दों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर मायावती ने साफ कहा कि पार्टी इसका समर्थन करती है, लेकिन इस कानून को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए सामाजिक संतुलन बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित नहीं किया गया, तब समाज के वंचित वर्गों को इसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा जब सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिले। महिलाओं की आबादी के अनुपात को ध्यान में रखते हुए उन्हें पर्याप्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए और कमजोर वर्गों की महिलाओं के हितों की विशेष सुरक्षा भी जरूरी है। आशीष दुबे / 22 अप्रैल 2026