अंतर्राष्ट्रीय
22-Apr-2026


-कूटनीति के स्तर पर काम जारी विदेश मंत्री रुस पहुंचे तेहरान,(ईएमएस)। ईरान इस समय एक साथ दो मोर्चों पर सक्रिय दिखाई दे रहा है, सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और कूटनीतिक प्रयास दोनों की मोर्चों पर वहां सक्रिय है। हाल ही में तेहरान की सड़कों पर आयोजित मिसाइल परेड ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। इस परेड में अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें एस-300 मिसाइल सिस्टम भी शामिल था। यह आयोजन संघर्षविराम अवधि समाप्त होने से ठीक पहले हुआ, जिससे यह संकेत गया कि ईराना संभावित खतरे के लिए पूरी तरह तैयार है। इस सैन्य प्रदर्शन में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रदर्शन किया। इसमें खोर्रमशहर-4, घदर और सिज्जिल जैसी मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता 2000 से 2500 किलोमीटर तक है। ये मिसाइलें क्षेत्रीय स्तर पर इजराइल, सउदी अरब और अन्य पश्चिमी ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम मानी जाती हैं। इसके अलावा, शाहिद जैसे ड्रोन भी ईरान की सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इस परेड का उद्देश्य केवल आंतरिक मनोबल बढ़ाना नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति दिखाना था। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने आयोजन की सराहना की और देश की रक्षा क्षमता का प्रतीक बताया। जनता की भागीदारी और समर्थन से यह भी स्पष्ट हुआ कि देश के भीतर सरकार के प्रति समर्थन मजबूत है। दूसरी ओर, ईरान कूटनीतिक प्रयास भी तेज कर रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में रुस की राजधानी मॉस्को पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इसके बाद उनका कार्यक्रम रोम में स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत करने का है। यह दिखाता है कि ईरान सैन्य सख्ती के साथ-साथ बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। 2015 के ईरान परमाणु समझौता के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.6 प्रतिशत तक सीमित रखने का वादा किया था। हालांकि, 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के समझौते से हटने के बाद हालात बदल गए। अब ईरान के पास लगभग 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन करने की क्षमता बताई जाती है, जो हथियार स्तर के करीब मानी जाती है। अमेरिका की ओर से भी मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। एक ओर बातचीत की इच्छा जताई जा रही है, दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा है कि बातचीत निर्णायक मोड़ पर है। इस तरह ईरान की रणनीति स्पष्ट रूप से दोहरी है—एक ओर सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर संभावित विरोधियों को चेतावनी देना, और दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास करना। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संतुलन किस दिशा में जाता है और क्या परमाणु मुद्दे पर कोई स्थायी समझौता हो पाता है या नहीं। आशीष दुबे / 22 अप्रैल 2026