राष्ट्रीय
23-Apr-2026
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-453 किमी लंबी परियोजना से ऊर्जा आपूर्ति होगी तेज, टैंकरों पर निर्भरता घटेगी नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने हैदराबाद से नागपुर तक एलपीजी पाइपलाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस परियोजना पर लगभग 1,585 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह पाइपलाइन तेलंगाना के चेर्लापल्ली स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एलपीजी टर्मिनल से शुरू होकर वारंगल और महाराष्ट्र के चंद्रपुर होते हुए नागपुर तक पहुंचेगी। करीब 453 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन दक्षिण और मध्य भारत के बीच एक महत्वपूर्ण ऊर्जा कॉरिडोर के रूप में काम करेगी। परियोजना की खास बात यह है कि इसके जरिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम के छह प्रमुख एलपीजी बॉटलिंग प्लांट्स को जोड़ा जाएगा, जिसमें नागपुर का बड़ा प्लांट भी शामिल है। इस पाइपलाइन की वार्षिक क्षमता 510 टीएमटी एलपीजी परिवहन की होगी, जिससे क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति के लिए सड़कों पर चलने वाले भारी टैंकरों पर काफी निर्भरता है। इससे न केवल परिवहन लागत बढ़ती है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। पाइपलाइन बनने के बाद गैस की आपूर्ति अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती हो जाएगी। साथ ही, सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा। यह परियोजना केंद्र सरकार के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक देश में थोक एलपीजी परिवहन को पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के निर्माण कार्य के 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे पूरा होने में करीब डेढ़ से दो साल का समय लगेगा। यदि सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ, तो 2028-29 तक यह पाइपलाइन पूरी तरह चालू हो जाएगी। इस परियोजना से न केवल औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि लाखों उपभोक्ताओं को भी विश्वसनीय और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। हिदायत/ईएमएस 23 अप्रैल 2026