राज्य
23-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) ने आपराधिक न्याय प्रणाली में आधुनिक तकनीक के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (सीएपीटी) भोपाल के तत्वावधान में और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से आयोजित हुआ। सम्मेलन का नेतृत्व एनसीआरबी एवं बीपीआरएंडडी के महानिदेशक आलोक रंजन द्वारा किया गया। इसमें न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, फारेंसिक विज्ञान और सुधारात्मक सेवाओं से जुड़े 170 से अधिक विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन संबोधन न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने किया, जबकि आलोक रंजन ने विशेष संबोधन में एआई के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली के पांचों स्तंभों (न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, फोरेंसिक और सुधारात्मक प्रशासन) में एआई की बढ़ती भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि ई-गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के मानकीकरण में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही प्रिडिक्टिव पुलिसिंग, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम, साइबर फारेंसिक और एआइ आधारित साक्ष्य विश्लेषण जैसे आधुनिक उपकरणों के जरिए जांच की दक्षता और सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। हालांकि, प्रतिभागियों ने एआई से जुड़ी चुनौतियों पर भी गंभीर चिंता जताई। एल्गोरिदमिक पक्षपात, फाल्स पाजिटिव और स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता जैसे मुद्दों को प्रमुख जोखिम बताया गया। इसके अलावा एआइ-जनित साक्ष्यों की स्वीकार्यता, डीपफेक तकनीक से उत्पन्न खतरे और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी विस्तार से विचार किया गया। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/24/ अप्रैल /2026