सुप्रीम कोर्ट से सुनाया फैसला, महिला की ओर से दाखिल अपील की खारिज नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर डीएनए टेस्ट से साबित हो जाता है कि शख्स बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उसे गुजारा देने के निर्देश नहीं दिए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि फिर भले ही बच्चे का जन्म शादी के दौरान ही क्यों न हुआ हो। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला की तरफ से दाखिल अपील खारिज कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच महिला की अपील पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने बेटी को गुजारा देने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस दौरान कोर्ट ने पिता का पता करने लिए होने वाली आधुनिक जांचों के बीच संबंध पर चर्चा की। कोर्ट ने अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया के 2023 फैसले का जिक्र किया। इसमें कोर्ट ने कहा था कि डीएनए जांच के रूटीन तौर पर आदेश नहीं दिए जाने चाहिए। साथ ही 2025 के इवान रतिनम बनाम मिलान जोसेफ का भी जिक्र किया था। खास बात है कि मौजूदा बेंच का मानना था कि डीएनए जांच के आदेश सतर्कता के साथ ही दिए जाने चाहिए। बेंच ने कहा कि इन सभी पुराने फैसलों में एक बात समान है कि जजों ने हमेशा डीएनए टेस्ट का आदेश देने या उसे मंजूरी देने में सावधानी और हिचकिचाहट दिखाई है। हम इस रुख से पूरी तरह सहमत हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि हालात बदलते हैं और डीएनए टेस्ट पहले ही हो चुका है और रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। ऐसे में बेंच ने कहा कि मौजूदा केस पिछले मामलों से अलग है। बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपील की है, उसने न केवल इस टेस्ट के लिए अपनी सहमति दी थी, बल्कि इसकी रिपोर्ट के नतीजों पर कभी कोई सवाल भी नहीं उठाया। दूसरे शब्दों में यह रिपोर्ट अब पूरी तरह से अंतिम और मान्य हो चुकी है। अदालत ने नंदलाल वासुदेव बडवाइक बनाम लता नंदलाल बडवाइक के केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले की स्थिति ऐसी ही है। इससे साफ हो गया था कि वैज्ञानिक सबूत और कानूनी अनुमान के बीच टकराव हो, तो जीत विज्ञान की होनी चाहिए। इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि बच्चे को गुजारा नहीं देने के फैसले में कोई गलती नहीं हुई है। कोर्ट ने महिला की अपील खारिज कर दी, लेकिन महिला एवं बाल विकास को बच्चे के हालात की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कमी पाए जाने पर उपाय करने के लिए भी कहा है। बता दें कपल की शादी 2016 में हुई थी, लेकिन दोनों के बीच विवाद होने के बाद में महिला ने अपने और बच्चे के लिए गुजारा की मांग की थी। कोर्ट में सुनवाई में प्रतिवादी यानी पति ने डीएनए टेस्ट की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने इसकी अनुमति दी और रिपोर्ट से साबित हुआ कि वह बच्चे का पिता नहीं है। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने बच्चे के लिए गुजारा देने की अपील को खारिज कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी आदेश को बरकरार रखा था। सिराज/ईएमएस 23अप्रैल26 ---------------------------------