राष्ट्रीय
23-Apr-2026
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-एक्टर विजय की एंट्री ने दशकों पुरानी दो-ध्रुवीय राजनीति पूरी तरह बदल दी चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु का 2026 का विधानसभा चुनाव राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी मोड़ के रूप में दर्ज होने जा रहा है। यह चुनाव केवल सत्ता के परिवर्तन का संघर्ष नहीं है, बल्कि उस पांच दशक पुराने राजनीतिक ढांचे के ढहने का संकेत है जिसमें केवल दो द्रविड़ दिग्गजों डीएमके और एआईएडीएमके का वर्चस्व रहा है। अभिनेता-राजनेता विजय और उनकी पार्टी टीवीके के प्रवेश ने एक स्थिर दो-ध्रुवीय व्यवस्था को एक अस्थिर और रोमांचक त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। पिछले 50 से ज्यादा सालों से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ियन विचारधारा, सामाजिक न्याय और लोक-कल्याणकारी नीतियों की धुरी पर घूमती रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम एम के स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी सांगठनिक शक्ति का लोहा मनवाया। प्रशासनिक स्थिरता और द्रविड़ मॉडल के नैरेटिव ने उन्हें अल्पसंख्यकों और शहरी मध्यम वर्ग के बीच मजबूत बनाए रखा है। जय जयललिता के निधन के बाद भी एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके ने अपना वोट बैंक काफी हद तक बचाए रखा है। विपक्ष के रूप में यह पार्टी सत्ता-विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश करती रही है। अब तक छोटी पार्टियां या तो इन दो दिग्गजों के साथ गठबंधन में समा जाती थीं या हाशिए पर रहती थीं, लेकिन विजय ने इस परिपाटी को चुनौती दी है। राजनीति में विजय के कदम रखने से, अब यह दशकों पुरानी दो-ध्रुवीय राजनीति पूरी तरह बदल गई है। तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक, विजय ने अपनी ज़बरदस्त लोकप्रियता को एक राजनीतिक मंच में बदल दिया है, जिसका मकसद इन दोनों ही द्रविड़ियन पार्टियों को चुनौती देना है। टीवीके ने भ्रष्टाचार-विरोध, शासन-सुधार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को आधार बनाकर, बहुत तेज़ी से युवाओं के बीच अपना समर्थन-आधार तैयार किया है, साथ ही, पार्टी ने ज़मीनी स्तर पर अपने विस्तार पर भी काफी ज़ोर दिया है, जिसमें बूथ-स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना भी शामिल है। सबसे अहम बात यह है कि टीवीके की रणनीति विजय की निजी लोकप्रियता से कहीं आगे तक जाती है। पार्टी ने इस चुनाव को एक पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर पेश किया है, जिसमें युवाओं को नौकरी, इंटर्नशिप और आर्थिक मदद का वादा करके उन्हें लुभाने की कोशिश की गई है। यह तरीका ऐसे राज्य में बहुत मायने रखता है, जहां युवाओं की आबादी बहुत ज़्यादा है करीब 12.5 लाख पहली बार वोट देने वाले और 40 साल से कम उम्र के करीब 2.5 करोड़ वोटर हैं। विजय ने महिला वोटरों को लुभाने के लिए भी ज़ोरदार कोशिश की है। ये वोटर कुल वोटरों का करीब 51 फ़ीसदी हिस्सा हैं। टीवीके ने कई चुनावी वादे किए हैं। ये वादे एक रणनीतिक बदलाव का संकेत हैं, खासकर तब जब पार्टी के अंदर पहले डीएमके सरकार की महिलाओं के लिए 1,000 रुपये की मदद जैसी कल्याणकारी योजनाओं की आलोचना की गई थी। टीवीके के ज़्यादातर अकेले चुनाव लड़ने के फ़ैसले ने समीकरणों को उलझा दिया है, जिससे डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को ही अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने पर मजबूर होना पड़ा है। एआईएडीएमके ने इस चुनाव को डीएमके के साथ सीधी लड़ाई के तौर पर पेश करने की कोशिश की है, ताकि सत्ता-विरोधी वोटों का बंटवारा न हो, वहीं, डीएमके युवाओं के वोट छिटकने के जोखिम के बावजूद अपने मुख्य वोट बैंक को बचाए रखने के लिए अपने शासन के कामकाज और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण पर ही ज़्यादा ज़ोर दे रही है। ज़मीनी स्तर पर, इस चुनाव का तीन-तरफ़ा स्वरूप दक्षिणी ज़िलों जैसे कन्याकुमारी, थूथुकुडी और तिरुनेलवेली में और साथ ही चेन्नई जैसे शहरी केंद्रों में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इन जगहों पर टीवीके की मौजूदगी ने वोट देने के पारंपरिक तरीकों और जीत-हार के अंतर को बदल दिया है। तमिलनाडु का 2026 का विधानसभा चुनाव अब कोई सीधा-सादा मुक़ाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक त्रिकोणीय लड़ाई बन चुका है। डीएमके, एआईएडीएमके और टीवीके के बीच चल रही इस त्रिकोणीय जंग में, भले ही यह नई पार्टी सीधे तौर पर विजेता बनकर न उभरे, लेकिन चुनाव परिणामों को तय करने में इसकी भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। सर्वेक्षण बताते हैं कि जहां 40 फीसदी मतदाता अभी भी इस चुनाव को डीएमके बनाम एआईएडीएमके की पारंपरिक जंग मानते हैं, वहीं 20 फीसदी लोग विजय को एक वास्तविक और मजबूत विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। भले ही विजय सीधे तौर पर सत्ता तक न पहुंचें, लेकिन उनकी पार्टी किंगमेकर बनकर उभरेगी और भविष्य के गठबंधनों की दिशा तय करेगी। सिराज/ईएमएस 23अप्रैल26