नई दिल्ली (ईएमएस)। शेयर बाजार में स्वचालित और अनुकूलित ट्रेडिंग सुविधा स्मार्ट ऑर्डर राउटिंग (एसओआर) ने नकदी खंड में तेजी से अपनी पैठ बनाई है, लेकिन नियामक सुरक्षा उपायों के कारण इसकी समग्र स्वीकृति धीमी बनी हुई है। एनएसई और बीएसई पर पिछले एक साल में नकदी सौदों में एसओआर की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। एनएसई मार्केट पल्स के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक एनएसई में नकदी सौदों के कुल मूल्य में एसओआर की हिस्सेदारी बढ़कर 3.3 फीसदी हो गई, जो एक साल पहले 0.7 फीसदी थी। बीएसई पर भी यह आंकड़ा 1.72 फीसदी से बढ़कर 2.94 फीसदी रहा। हालांकि, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में एसओआर का उपयोग लगभग नगण्य है। इस बीच, ट्रेडिंग गतिविधियों में कोलोकेशन (कुल ट्रेडेड वैल्यू का 44 फीसदी) और मोबाइल ट्रेडिंग (20.1 फीसदी) ने भी अपनी पकड़ मजबूत की है। इक्विटी ऑप्शंस में भी ये दोनों तरीके प्रभावी रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एसओआर की धीमी स्वीकृति का मुख्य कारण नियामक के कड़े सुरक्षा उपाय हैं। ब्रोकरों को अपने राउटिंग एल्गोरिदम के व्यापक ऑडिट, जोखिम जांच और मॉक टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है, ताकि बाजार में अस्थिरता से बचा जा सके। जेएम फाइनैंशियल के अनुसार एसओआर की विफलता से पूरे बाजार में तकनीकी गड़बड़ी फैलने का खतरा होता है, इसलिए नियामक की यह सावधानी आवश्यक है। उनका मानना है कि यह स्थिति अस्थायी है और समय के साथ सिस्टम व मंजूरी प्रक्रिया में तालमेल बैठ जाएगा। कई ब्रोकरों को मंजूरी मिल गई है, जबकि अन्य अभी भी इंतजार में हैं। सतीश मोरे/24अप्रैल ---