वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस टकराव के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) है, जिसे दोनों पक्ष एक बार्गेनिंग चिप की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। तेल और गैस ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और इसकी आपूर्ति में बाधा आने से तेहरान की आर्थिक मुश्किलें बढ़ना तय है। अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए इस मार्ग की नाकाबंदी का ऐलान किया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी इस अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कॉरिडोर को बंद करने की धमकी दी है। तनाव इस कदर बढ़ गया है कि ईरानी सेना द्वारा भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की खबरें भी सामने आई हैं। तेहरान का मानना है कि इस मार्ग को बंद करने से वैश्विक दबाव बनेगा, जिससे अमेरिका युद्ध रोकने पर मजबूर होगा। इन परिस्थितियों के बीच ईरान के खर्ग आइलैंड से एक महत्वपूर्ण खबर आई है। ईरान ने अपनी भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नाशा नामक 30 साल पुराने और निष्क्रिय पड़े सुपरटैंकर को फिर से सेवा में उतार दिया है। यह कदम खर्ग द्वीप पर तेल भंडारण की संभावित कमी से निपटने की तैयारी माना जा रहा है, क्योंकि देश का 90 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से निर्यात होता है। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। आपूर्ति बाधित होने की अफवाहों के चलते खंडवा सहित देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं। खंडवा जिले में महज तीन घंटे के भीतर एक लाख लीटर पेट्रोल की अतिरिक्त खपत दर्ज की गई, जिसके कारण लगभग 50 पेट्रोल पंपों का स्टॉक समाप्त हो गया। वर्तमान में प्रशासन के पास केवल दो दिन का एडवांस स्टॉक उपलब्ध है, जबकि जिले की औसत दैनिक खपत दो लाख लीटर पेट्रोल और साढ़े तीन लाख लीटर डीजल है। हालांकि ईरान फ्लोटिंग स्टोरेज के माध्यम से अपनी स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पुराने जहाजों की धीमी गति उसकी परिचालन क्षमता पर सवाल उठा रही है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो भारत जैसे आयात निर्भर देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती और अधिक गंभीर हो सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस 25 अप्रैल 2026