- हत्या को आत्महत्या बनाने के लिए तीसरी मंजिल से फेंका था शिल्पू का शव इन्दौर (ईएमएस) अपर सत्र न्यायाधीश विश्व दीपक तिवारी की कोर्ट ने बहुचर्चित शिल्पी भदौरिया हत्याकांड मामले की सुनवाई उपरांत तीनों आरोपियों को दोषी करार देते उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है। वर्ष 2016 में इंदौर की लेमन ट्री होटल में हुए इस हत्याकांड के आरोपियों के नाम आशुतोष पिता सुधाकर जोहरे, शैलेंद्र पिता पवन सारस्वत और नीरज पिता हर्ष कुमार दंडोतिया तीनों निवासी ग्वालियर हैं। इन्होंने शिल्पी भदौरिया की गला घोट हत्या कर उसके शव को होटल की तीसरी मंजिल से नीचे फेंक मामले को आत्महत्या का बनाने का प्रयास भी किया था। प्रकरण सुनवाई दौरान अभियोजन पैरवी अपर लोक अभियोजक श्याम दांगी ने की। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि इन्दौर के आएनटी मार्ग स्थित होटल लेमन ट्री में चौथी मंजिल पर ठहरी शिल्पू भदौरिया का शव रात 8.40 बजे ग्राउण्ड फ्लोर पर मिला था। वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। घटना 7 अगस्त 2016 की थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आत्महत्या के प्रतीत हो रहे इस मामले में जांच की तो एक के बाद एक कड़ियां जुड़ी और यह आत्महत्या का प्रतीत हो रहा मामला जघन्य हत्या का साबित हो गया। जांच में पुलिस के सामने यह बात आई कि घटना समय शिल्पू का दोस्त आशुतोष दो अन्य दोस्तों शैलेंद्र और नीरज के साथ वहीं मौजूद था। इस दौरान इनमें आपस में विवाद भी हुआ था। वहीं शिल्पू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण गला घोंटने से हुई बताया वहीं रिपोर्ट में उसके शरीर पर मारपीट के निशान भी बताएं गये जिसके बाद पुलिस ने इन तीनों से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकारा कि उनका शिल्पू से विवाद हुआ था और उन्होंने उसकी हत्या कर शव नीचे फेंका था। पुलिस को जांच के दौरान मामले में तकनीकी सहायता, कॉल डिटेल और अन्य सूत्र भी मिले, जिससे मामले का खुलासा हुआ कि हत्यापूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी और इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर विवेचना उपरांत प्रकरण चालान कोर्ट में पेश किया जिस पर करीब 10 साल तक चली सुनवाई उपरांत सक्षम न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हत्या के मामले में उम्र कैद और साक्ष्य मिटाने के आरोप में 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। आनंद पुरोहित/ 25 अप्रैल 2026