व्यापार
25-Apr-2026


- खाने से लेकर रोजमर्रा के उत्पादों तक पर पड़ेगा असर नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। वैश्विक तनावों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच भारत एक और बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की आपूर्ति में संभावित बाधाओं के साथ-साथ अब देश के लिए पाम तेल की उपलब्धता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे रोजमर्रा के जीवन पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। भारत दुनिया में पाम तेल का सबसे बड़ा आयातक है, अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया पर निर्भर करता है। हाल ही में इंडोनेशिया द्वारा पाम तेल के निर्यात पर संभावित प्रतिबंध लगाने की घोषणा से भारत की खाद्य सुरक्षा पर संकट गहरा गया है। भारत हर साल लगभग 95 लाख टन पाम तेल का उपयोग करता है, जबकि उत्पादन 4 लाख टन से भी कम है। यह देश के कुल खाद्य तेल का 40 फीसदी है, जो सस्ता होने और लंबे समय तक स्थिर रहने के कारण आधे से अधिक परिवारों की रसोई का अभिन्न अंग है। पाम तेल सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। तले हुए चिप्स, नमकीन, बिस्कुट, केक, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, आइसक्रीम और सभी रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों में इसका व्यापक उपयोग होता है। होटल, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड विक्रेता भी तलने व मसाला बनाने के लिए इसे प्राथमिकता देते हैं। खाद्य उद्योग में 70 फीसदी से अधिक पाम तेल खपत होता है। इसके अलावा, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन, लोशन और यहां तक कि टूथपेस्ट जैसे गैर-खाद्य उत्पादों में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। पाम तेल की आपूर्ति में किसी भी बाधा से महंगाई बढ़ने और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। सतीश मोरे/25अप्रैल ---