व्यापार
27-Apr-2026


-प्रीमियम अब 33 मिलियन डॉलर हुआ जो पिछले साल के मुकाबले 10फीसदी ज्यादा नई दिल्ली,(ईएमएस)। गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एयर इंडिया का यात्री विमान एआई-171 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस गंभीर हादसे में 475 मिलियन डॉलर के क्लेम का सामना करने के बावजूद, टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया ने अपने एविएशन इंश्योरेंस को मामूली बढ़ोतरी के साथ रिन्यू किया है। कंपनी ने करीब 300 विमानों के बेड़े और 20 अरब डॉलर की संपत्ति को कवर करने वाली बीमा पॉलिसी को नवीनीकृत किया, जिसका वार्षिक प्रीमियम अब करीब 33 मिलियन डॉलर हो गया है। यह पिछले साल के 30 मिलियन डॉलर से केवल 10फीसदी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े क्लेम और एक गंभीर हादसे के बावजूद बीमा दरों में बड़ी वृद्धि क्यों नहीं हुई। उद्योग से जुड़े सूत्रों और लंदन जैसे प्रमुख एविएशन इंश्योरेंस हब के विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह वैश्विक रीइंश्योरेंस बाजार का नरम रहना है। बाजार में पर्याप्त फंड और कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है, जो बड़े नुकसान के बाद भी एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस के लिए प्रीमियम में तेज बढ़ोतरी को रोक रही है। एयरलाइन की देनदारी कवर पहले की तरह करीब 1.5 अरब डॉलर पर स्थिर है। वैश्विक बीमा बाजार की वर्तमान स्थिति, विशेषकर एविएशन सेक्टर में, ऐसी है कि बड़े नुकसान भी तत्काल प्रीमियम दरों पर व्यापक असर नहीं डालते। सूत्रों का कहना है कि इस बार एयर इंडिया को रिन्यूअल के दौरान एक बार का अतिरिक्त खर्च जरूर वहन करना पड़ा, लेकिन इसके अलावा प्रीमियम में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई। पिछले साल कवर देने वाली बीमा और रीइंश्योरेंस कंपनियों ने इस बार भी वही शर्तें जारी रखीं। एयर इंडिया की इस पॉलिसी में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस (45फीसदी), आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस (7फीसदी), न्यू इंडिया एश्योरेंस (32फीसदी) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी (14फीसदी) जैसी प्रमुख भारतीय बीमा कंपनियां शामिल हैं। इस पॉलिसी का करीब 95फीसदी हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रीइंश्योर किया गया है, जिसमें एआईजी, एक्सा और एलायंस जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां और जीआईसी री भी भागीदार हैं। ग्लोबल एविएशन ब्रोकिंग कंपनी विलिस के मुताबिक 2025 एयरलाइन बीमा कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि इस दौरान कई महंगे क्लेम आए। फिर भी, प्रीमियम पर सीधा असर इसलिए नहीं पड़ा क्योंकि बाजार में पर्याप्त क्षमता है और हर क्लेम में सभी बीमा कंपनियां शामिल नहीं होतीं। हालांकि, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक वित्त 2026 में भारतीय बीमा कंपनियों का कुल सकल प्रीमियम मामूली रूप से 0.8फीसदी घटकर 1,089.27 करोड़ रुपए रह गया, जिसमें न्यू इंडिया एश्योरेंस का योगदान सबसे अधिक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौजूदा स्थिरता वैश्विक बाजार में उपलब्ध पर्याप्त क्षमता के कारण है, लेकिन अगर बड़े और महंगे हादसे लगातार होते रहे, तो यह कम कीमत पर जोखिम कवर करने की स्थिति बदल सकती है और बाजार अचानक सख्त हो सकता है। भविष्य में रीइंश्योरेंस की बढ़ती लागत और साइबर सुरक्षा जैसे नए खतरे भी प्रीमियम दरों को प्रभावित कर सकते हैं। सिराज/ईएमएस 27अप्रैल26