रायसेन। जिले में गेहूं उपार्जन व्यवस्था इस बार छोटे और बड़े किसानों के बीच संतुलन बनाने के चक्कर में उलझती नजर आ रही है। हालात यह हैं कि समर्थन मूल्य पर गेहूं चना बेचने के लिए किसानों को स्लॉट बुक कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान घंटों तक ऑनलाइन प्रक्रिया में उलझे रहते हैं।फिर भी उन्हें समय पर स्लॉट नहीं मिल पा रहा। इसका सीधा असर खरीदी की रफ्तार पर भी पड़ रहा है।जो अब तक अपेक्षा से काफी धीमी बनी हुई है। दरअसल, शासन द्वारा छोटे किसानों को प्राथमिकता देने और बड़े किसानों के लिए अलग प्रबंधन की व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था उल्टा किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। दो हेक्टेयर से कम और अधिक रकबे वाले किसानों के लिए अलग-अलग स्लॉट बुक के लिए निर्धारित किए जाने के कारण पोर्टल पर तकनीकी अड़चनें आ रही हैं। कई बार सर्वर स्लो होने से किसान बार-बार प्रयास करने के बाद भी स्लॉट बुक नहीं कर पा रहे। किसानों का कहना है कि पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर स्लॉट मिल जाता था।लेकिन अब नई व्यवस्था में श्रेणीवार प्राथमिकता के कारण भ्रम की स्थिति बन गई है। छोटे किसानों के लिए सीमित स्लॉट खुलते हैं, जो कुछ ही मिनटों में भर जाते हैं। वहीं बड़े किसानों को अलग समय दिया जा रहा है, तो लेकिन उनके स्लॉट भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में दोनों ही वर्ग के किसान परेशान हैं। गांवों से आए किसानों को कई बार साइबर कैफे , सीएससी सेंटर या उपार्जन केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कुछ किसान तो सुबह से शाम तक इंतजार करते रहते है। लेकिन फिर भी उनका नंबर नहीं आता। कई जगहों पर पटवारी सत्यापन और भूमि रकबे के आंकड़ों में गड़बड़ी भी सामने आ रही है। जिससे स्लॉट बुकिंग और अधिक जटिल हो गई है। उधर, खरीदी केंद्रों पर भी अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। जहां स्लॉट बुकिंग कम हो रही है। वहां केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।जबकि जिन केंद्रों पर ज्यादा स्लॉट खुलते हैं, वहां लंबी कतारें लग रही हैं। इससे खरीदी प्रक्रिया संतुलित नहीं हो पा रही और गेहूं की आवक भी प्रभावित हो रही है। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही छोटे और बड़े किसानों के बीच अलग-अलग व्यवस्था लागू करने के बजाय सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया जाए। किसानों का कहना है कि गेहूं पहले से तैयार है।लेकिन समय पर स्लॉट नहीं मिलने के कारण उन्हें फसल खुले में रखने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे उनको नुकसान की आशंका भी बढ़ रही है। पजिला फूड अधिकारी राजू कातुलकर का कहना है कि कंप्यूटर के पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही जरूरत के अनुसार स्लॉट की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।अधिकारियों ने किसानों से धैर्य बनाए रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्लॉट बुक कराने की अपील की है।हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि जब तक स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को सहज और सुचारू नहीं बनाया जाएगा।तब तक किसानों की परेशानी कम होने वाली नहीं है। गेहूं खरीदी का सीजन सीमित समय का होता है, ऐसे में हर दिन की देरी किसानों के लिए चिंता बढ़ा रही है। गेहूं खरीदी को लेकर प्रशासन हुआ सख्त कलेक्टर ने उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण कर लिया जायजा रायसेन। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन कार्य को लेकर जिला प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने ग्राम गुदावल और आमखेड़ा स्थित गेहूं उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में पाई गई कमियों पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और केंद्र प्रभारियों को फटकार लगाते हुए सुधार के सख्त निर्देश दिए। कलेक्टर ने सबसे पहले उपार्जन केंद्रों पर पहुंचकर तुलाई व्यवस्था, किसानों की सुविधा, बारदाने की उपलब्धता और उपज की गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने केंद्र प्रभारी से अब तक खरीदे गए गेहूं की कुल मात्रा, किसानों की संख्या, भुगतान की स्थिति और स्टॉक की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पाया कि कुछ केंद्रों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं।जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन द्वारा निर्धारित उपार्जन नीति के अनुसार ही गेहूं खरीदी का कार्य किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। कलेक्टर विश्वकर्मा ने किसानों से सीधे संवाद भी किया और उनसे उपार्जन केंद्रों पर मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। कुछ किसानों ने तुलाई में देरी और भुगतान में विलंब की समस्या बताई, जिस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने विशेष रूप से बारदाने की उपलब्धता पर जोर देते हुए कहा कि कहीं भी बारदाने की कमी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी केंद्र पर कमी की स्थिति बनती है, तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने उपज की गुणवत्ता की जांच भी की और निर्देश दिए कि मानकों के अनुरूप ही गेहूं की खरीदी की जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी देखा कि कुछ स्थानों पर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीदी प्रक्रिया को तेज किया जाए और किसानों को अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े। उन्होंने कहा कि खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्य सुचारू रूप से चलता रहे। कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि उपार्जन केंद्रों पर साफ-सफाई, पेयजल और छाया जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में किसानों को राहत देने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। निरीक्षण के दौरान सहकारिता, कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि गेहूं उपार्जन कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके। कलेक्टर विश्वकर्मा ने अंत में कहा कि गेहूं उपार्जन शासन की महत्वपूर्ण योजना है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे तौर पर किसानों को प्रभावित करती है। इसलिए सभी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ कार्य करें, ताकि जिले में उपार्जन कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके। किशोर वर्मा ईएमएस रायसेन 25/04/2026