व्यापार
26-Apr-2026


- चौथी तिमाही में कंपनी ने बदले आपूर्तिकर्ता और अनुबंध, खाड़ी संकट से निपटा नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधानों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाए। कंपनी ने अस्थिर बाजार और ईरान युद्ध जैसे तनावों के बावजूद अपने परिचालन को सुचारू बनाए रखा। रिलायंस ने बताया कि अस्थिर ऊर्जा बाजार, भू-राजनीतिक व्यवधानों और लागत में भारी उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए उसने कच्चे तेल की सक्रिय सोर्सिंग और परिचालन बदलावों का सहारा लिया। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल और गैस प्रवाह बाधित होने पर, कंपनी ने आपूर्ति की भरपाई के लिए फारस की खाड़ी के अलावा दूसरे आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क किया। रिफाइनरी परिचालन में कटौती से बचने के लिए, रिलायंस ने फारस की खाड़ी के लोडिंग अनुबंधों को बदला और कई भौगोलिक क्षेत्रों से कच्चे तेल की सोर्सिंग की। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर फंसे हुए कच्चे तेल के लिए वैकल्पिक मार्गों पर भी काम किया। वित्त वर्ष 2025-26 में वैश्विक कच्चा तेल बाजार काफी हद तक अधिशेष में रहा, लेकिन रूसी तेल पर प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा बाजारों में अव्यवस्था पैदा की। इन चुनौतियों के बावजूद, रिलायंस ने कच्चे माल की उपलब्धता सुरक्षित करके और परिचालन बनाए रखकर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ किया। रिफाइनिंग क्षमता की कमी और अप्रत्याशित मांग वृद्धि से ईंधन के मुनाफे में उछाल आया, हालांकि रसायनों पर अत्यधिक आपूर्ति का दबाव बना रहा। सतीश मोरे/26अप्रैल ---