- जबलपुर के पर्यटन उद्योग पर मंडराया खतरा जबलपुर, (ईएमएस)। टाइगर स्टेट कहलाने वाले मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौत अब सिर्फ वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर सीधे तौर पर जबलपुर के पर्यटन पर भी पड़ने लगा है। हाल ही में अमाही बाघिन (टी-141) के तीसरे शावक की मौत ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इससे पहले 21 और 24 अप्रैल को भी इसी बाघिन के दो शावकों की मौत हो चुकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि दो शावकों के पेट खाली थे, जिससे भूख से मौत की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से कान्हा टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ नेशनल पार्क में प्रबंधन संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं, उसका सीधा नुकसान जबलपुर को झेलना पड़ सकता है। जबलपुर: पर्यटन का चेक-इन प्वाइंट... जबलपुर, कान्हा और बांधवगढ़ जाने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट सिटी है। देश-विदेश से आने वाले अधिकांश पर्यटक पहले जबलपुर पहुंचते हैं और यहां रुककर आगे नेशनल पार्क्स की ओर जाते हैं। इस वजह से शहर के होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी और स्थानीय कारोबार को सीधा लाभ मिलता है। यदि नेशनल पार्क्स में बाघों की संख्या कम होती है या लगातार नकारात्मक खबरें आती हैं, तो पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ सकती है। इसका असर जबलपुर के होटल व्यवसाय, रेस्टोरेंट और टूरिज्म इंडस्ट्री पर पड़ेगा। एक महीने में चौथी मौत...... कान्हा में इस महीने यह चौथी बाघ से जुड़ी घटना है। 5 अप्रैल को टी-122 नाम की मादा बाघ की मौत हुई थी, जबकि 21 और 24 अप्रैल को दो शावकों की जान गई। 24 अप्रैल को बालाघाट के बैहर क्षेत्र में भी एक बाघ मृत मिला था। पिछले 8 महीनों में कान्हा में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है, जो प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बाघिन और बचे शावक पर भी खतरा... अमाही बाघिन की हालत भी कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में उसके बचे हुए एक शावक की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वन विभाग ने शवों को स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ भेजकर जांच शुरू कर दी है। पर्यटन विशेषज्ञों की चिंता... स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो जबलपुर आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट तय है। नेशनल पार्क्स यहां के पर्यटन की “रीढ़” हैं, और उनकी छवि खराब होने से पूरा इकोसिस्टम प्रभावित होगा। जरूरी है मजबूत प्रबंधन... विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल पार्क्स में बेहतर प्रबंधन, भोजन की उपलब्धता, सुरक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसका नुकसान सिर्फ वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जबलपुर की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा। सुनील साहू / शहबाज / 26 अप्रैल 2026/ 04.00