लेख
27-Apr-2026
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बिहार में लगता है कहीं फिर होगा सुशासन की जगह कूशासन ना हो जाए क्योंकि नीतीश सरकार सेवामुक़्त हो चुकी है और वहाँ की विपक्ष हमलावर दिखाई दे रही है आखिर इसके पीछे की मंशा क्या थी ये सभी को मालूम थी कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री चाहती है मुख्यमंत्री की रेश में नित्यानंद राय का भी नाम था जो अच्छा आदमी है बोलचाल की भाषा में, बिहार में जिस तरह से नीतीश कुमार को मुख्य मंत्री पद से सेवामुक़्त किया गया और राज्यसभा का सांसद के लिए मनाया गया और फिर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बनाया गया इससे छोटे दलों में ही नाराजगी नहीं है बल्कि बीजेपी का एक बड़ा वर्ग भी इससे नाराज है इसके पहले पूर्व में ऊर्जा मंत्री रह चूके डॉ आर के सिंह ने सम्राट चौधरी को लेकर सवाल किये वो पार्टी को लेकर बेहद चिंताजनक बात है खासकर बिहार को लेकर बीजेपी कई चेहरा थे जो साफ छवि और पढ़े लिखें थे और वर्षो का तजुर्बा था जैसे श्री नन्द किशोर यादव, वहाँ के बीजेपी के सांसद राजीव प्रताप रूड़ी जो पूर्व में वाजपेयी सरकार में सिविल एविएशन मिनिस्टर थे सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाना समझ से बाहर है क्योंकि उनके बोल चाल की भाषा पढ़े लिखे लोगों को पसंद नहीं आती है और शायद बाद में बिहार में बीजेपी को नुकसान हो सकता है नीतीश कुमार ने जानबूझकर उन्हें बनाने पर जोर दिया ताकि सम्राट चौधरी फिर क़ोई हरकत करेंगे और इसका खामियाजा बीजेपी को अगले चुनाव में क्या बंगाल के चुनाव में ही देखने को मिलेगा जहाँ ममता दीदी की सरकार पूर्ण बहुमत से बन रही है जिसमें निर्णायक भूमिका महिलाओ की होंगी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार जिस तरह बिहार में महिलाओ को एक सम्मान दिया इससे पश्चिम बंगाल में असर दिखेगा क्योंकि बिहार और बंगाल की सीमा सटी है जहाँ तक कुर्मी वोटर का सवाल है वो भी पश्चिम बंगाल में एंटी बीजेपी को गया है जिसकी संख्या काफी अधिक है इसलिए नीतीश कुमार ने बंगाल चुनाव से पहले ही खेल कर दिया और यूपी में भी बाद में असर आएगा आखिर बिहार में नीतीश कुमार को हटाने की जरुरत क्या थी स्वास्थ्य को लेकर जहाँ तक बात है तो राज्यसभा के सांसद भी नहीं बनाना चाहिए और क्या केंद्र में क़ोई अहम मंत्रालय मिलेगा सब तो भर गए फ़ूड या उससे सम्बंधित मंत्रालय ही मिलेगा जो नीतीश कुमार लेंगे नहीं जहाँ तक बिहार के विकास की बात है तो बुलडोजर से विकास नहीं होगा क्योंकि इससे गरीबो का रोजगार चौपट होता है जब ईरान में घायल मुर्तज़ा खामनोई बेड पर रहकर भी ईरान की सत्ता चला रहे हैं और आईआरजीसी और वहाँ के मंत्री में टकराव देखने को मिला है उससे ऐ साफ जाहिर है कि देश या राज्य चलाऐ रखने हेतु हेल्थ क़ोई मुद्दा नहीं होता निर्णय लेना ही महत्वपूर्ण होता है और जिस तरह नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री थे तब बिहार में इन्वेस्टमेंट के कई फाइल को रिजेक्ट किया था जो उनके हिसाब से बिहार जैसे गरीब राज्य में अगर इन्वेस्टमेंट हुआ तो तोड़फोड़ होगा जमीनों पर कब्ज़ा होगा और गरीबों को नुकसान होगा इसलिए बिहार में बीजेपी ने नीतीश कुमार को राज्यसभा में लाकर सेल्फ गोल कर लिया है जोड़ तोड़ की राजनीति ज्यादा दिनों तक नहीं चलती और दूसरे के घर में झंकाना सही नहीं है इससे समय बर्बाद होता है और व्यक्तिगत आरोप लगता है जो राजनीति में गलत है अब आमआदमी पार्टी के 3 राज्यसभा सांसद आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में गए हैं सही नहीं है आपको कभी किसी पार्टी ने विश्वास में लिया है तो धोखा देना सही नहीं है अब केजरीवाल के घर का वीडियो दिखाया जा रहा है और बीजेपी आरोप लगा रही है कि इतना बड़ा महल कैसे बनाया, ये व्यक्तित आरोप है इससे बचना चाहिए क्योंकि जब भी माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदीजी के ऊपर जब भी किसी बिपक्षी पार्टी ने व्यक्तित आरोप लगाएं हैं तब तब उस पार्टी का बहुत नुकसान हुआ है अतः राजनीति में व्यक्तित आरोप से बचना चाहिए। दरअसल बिहार में बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री ऐसा चाहिए जो बीजेपी के हाई कमान की बात को माने और सही गलत जो भी हो उसकी मर्यादा का पालन करना है। ईएमएस / 27 अप्रैल 26