नई दिल्ली,(ईएमएस)। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद विपक्ष के लिए मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रही हैं। राघव चड्ढा और संदीप पाठक के नेतृत्व में इन सांसदों ने अयोग्यता का सामना किए बिना बीजेपी में विलय के लिए आवश्यक जादुई दो-तिहाई बहुमत पा लिया। इस बीच अब इस उलटफेर से राज्यसभा में एनडीए और बीजेपी का समीकरण मजबूत होता दिख रहा है। बड़े पैमाने पर सांसदों के इस्तीफे से पहले, राज्यसभा में भाजपा की संख्या करीब 106 थी, जबकि एनडीए के पास करीब 121 सदस्य थे। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता सहित आप सेवन के शामिल होने से भाजपा की व्यक्तिगत संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीए की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 128 हो गई है। 243 सदस्यों वाली सदन में बहुमत के लिए 122 सीटों की जरुरत है। 128 सीटों के साथ एनडीए को साधारण बहुमत आसानी से मिल जाएगा। यह एक ऐतिहासिक बदलाव है; कांग्रेस के एकदलीय वर्चस्व के युग के बाद पहली बार सत्ताधारी गठबंधन को विवादास्पद सामान्य कानूनों को पारित करने के लिए तटस्थ क्षेत्रीय दलों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि साधारण बहुमत रोजमर्रा के शासन के लिए बड़ी जीत है, लेकिन भारतीय संसदीय शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य संवैधानिक संशोधनों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत है। 245 सदस्यों वाले पूर्ण सदन के लिए, यह अति-बहुमत 164 वोटों का है। आम आदमी पार्टी के सांसदों के दल-बदल से मिली अप्रत्याशित जीत के बावजूद, एनडीए को इस लक्ष्य से 36 सीटें कम रहेगी। इस अंतर का अर्थ यह है कि जहां सरकार अब सामान्य विधेयकों को आसानी से पारित कर सकती है, वहीं एक राष्ट्र, एक चुनाव ढांचा या परिसीमन प्रक्रिया में औपचारिक बदलाव जैसे बड़े संरचनात्मक परिवर्तनों के लिए भाजपा को अभी भी गुटनिरपेक्ष दलों के साथ संबंध सुधारने होगा या भविष्य के द्विवार्षिक चुनावों का इंतजार करना होगा। आशीषईएमएस 27 अप्रैल 2026