राष्ट्रीय
27-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों से उत्पन्न होने वाली अस्थिरता का लाभ आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) लंबे समय तक उठा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान में राजनीतिक या सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग विशेषज्ञ पीटर क्नूपे ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए इसकी तुलना 2003 में इराक पर हुए अमेरिकी हमले से की है। उन्होंने कहा कि उस समय इराक में सत्ता संतुलन बिगड़ने के कारण जो शून्यता पैदा हुई थी, उसी ने दाएश (आईएसआईएस) जैसे खूंखार संगठनों के उदय का मार्ग प्रशस्त किया था। तब इराक में बदलावों के खिलाफ उपजे विरोध ने दुनिया भर के कट्टरपंथियों को आकर्षित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, भले ही तथाकथित खिलाफत का अंत हो चुका हो, लेकिन इसके अवशेष आज भी पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं। रिपोर्ट में उन कारकों को रेखांकित किया गया है जो चरमपंथी संगठनों के पनपने में खाद-पानी का काम करते हैं। इनमें हथियारों का अवैध प्रसार, कमजोर शासन व्यवस्था, जनता में बढ़ता असंतोष, मानवाधिकारों का उल्लंघन और दमनकारी नीतियां प्रमुख हैं। ऐसे अवसरवादी माहौल में आतंकी संगठन लोगों के गुस्से और असुरक्षा की भावना का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर भर्ती और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। चेतावनी दी गई है कि ईरान में बढ़ते तनाव और हम बनाम वे जैसी पहचान आधारित राजनीति आईएसकेपी के नेतृत्व के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। इससे न केवल ईरान के भीतर बल्कि पड़ोसी देशों में भी शिया समुदायों, धार्मिक संस्थानों और व्यक्तियों पर लक्षित हमलों का जोखिम काफी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव आतंकी संगठनों को फिर से पैर पसारने का अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 27 अप्रैल 2026