अंतर्राष्ट्रीय
27-Apr-2026


भारत की पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी और क्षेत्र में स्थिरता कायम रखने की कोशिश कोलंबो,(ईएमएस)। श्रीलंका कोस्ट गार्ड मुख्यालय में रविवार को एक समारोह में भारत ने श्रीलंका को दो पर्सनल वॉटरक्राफ्ट और सेफ्टी गियर सौंपे। कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्‍स पर पोस्ट कर बताया कि भारत, श्रीलंका को तट के पास होने वाले सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन्स में उसकी क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। भारतीय उच्चायोग के डिफेंस एडवाइजर ने यह उपकरण मिरिस्सा में श्रीलंका कोस्ट गार्ड मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशन्स को सौंपे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 24 अप्रैल को श्रीलंका को दो भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग हित और मैत्री क्यूब भी दे चुका है। यह क्यूब ‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत दिया गया है। ये आधुनिक पोर्टेबल मेडिकल यूनिट्स एक बार में करीब 200 इमरजेंसी मामलों को संभाल सकती हैं। इन्हें तेजी से राहत पहुंचाने के लिए बनाया गया है और इनमें जरूरी दवाइयां और बेसिक सर्जरी के लिए उपकरण भी मौजूद हैं। इन मेडिकल यूनिट्स को भारतीय नौसेना के डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू जहाज आईएनएस निरीक्षक के जरिए पहुंचाया गया, जो 21 अप्रैल को कोलंबो पोर्ट पहुंचा था। यह जहाज इन-एसएलएन डाइवैक्स 2026 के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने आया है, जो 27 अप्रैल तक चलेगा। इस साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए आईएनएस निरीक्षक के क्रू ने शनिवार को श्रीलंका नौसेना के साथ एक योग सत्र भी किया था। इसका मकसद समुद्र में काम करने वाले जवानों के बीच मानसिक मजबूती, संतुलन और बेहतर तालमेल को बढ़ाना है। भारतीय नौसेना के मुताबिक इन-एसएलएन डाइविंग एक्सरसाइज भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री सहयोग का एक अहम हिस्सा है। ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के बीच भरोसा, सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के साझा लक्ष्य को मजबूत करते हैं। यह सब महासागर क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति विजन के तहत किया जा रहा है। समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए भारतीय नौसेना श्रीलंका नौसेना को नौ मिमी की 50,000 गोलियां भी सौंपेंगी। चीन पहले से ही श्रीलंका में बड़े निवेश कर चुका है, जैसे हंबनटोटा पोर्ट का विकास, जिसे वह अपनी बेल्ट एंड रोड पहल के तहत अहम मानता है। हालांकि भारत की ओर से श्रीलंका को रक्षा, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार सहयोग देने से संतुलन बदलता नजर आ रहा है। भारत की कोशिश है वह अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसेमंद साझेदारी बनाए और क्षेत्र में स्थिरता कायम रखे। वहीं चीन इसे अपने प्रभाव क्षेत्र में कमी के रूप में देख सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की नीति पर चल रहा है, ताकि उसे दोनों से आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सके। सिराज/ईएमएस 27अप्रैल26 ---------------------------------