रठगाँव, मिर्जापुर, मंजूरगढ़ी, पला और छेरत जैसे इलाके बने अवैध स्विमिंग पूलों के हब धर्मेन्द्र राघव अलीगढ़ (ईएमएस)। जिले में नकली एवं अधोमानक दवाओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा चलाया जा जवां थाना क्षेत्र की सीडीएफ चौकी इन दिनों अपनी कुंभकर्णी नींद के लिए सुर्खियों में है। गर्मी का पारा चढ़ते ही इस चौकी क्षेत्र के रठगाँव, मिर्जापुर, मंजूरगढ़ी, पला और छेरत जैसे इलाके अवैध स्विमिंग पूलों के हब बन चुके हैं। इलाके के हर दूसरे खेत में नीला पानी भरा है और मौत का खेल सजाया जा रहा है, लेकिन मजाल है कि चौकी इंचार्ज साहब की नजर इन पर पड़ जाए। इन गाँवों में जुगाड़ के वाटर पार्कों की बाढ़ हमारे फोटो जर्नलिस्ट रॉकी आलोक की पड़ताल में सामने आया है कि रठगाँव और मिर्जापुर की गलियों से लेकर मंजूरगढ़ी, पला और छेरत के खेतों तक, अवैध संचालकों ने बिना किसी डर के दुकानें खोल रखी हैं। सुरक्षा मानक ताक पररू गाँवों में चल रहे पूलों में न कोई लाइफगार्ड है और न ही फर्स्ट एड। लाइसेंस की जगह सेटिंग चर्चा है कि बिना किसी कागजी कार्यवाही के ये पूल चौकी की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहे हैं। चौकी इंचार्ज का अजब मौन, सवाल उठता है कि जब पूरा इलाका अवैध छपाक का केंद्र बन गया है, तो चौकी इंचार्ज साहब ने मौन व्रत क्यों धारण कर रखा है? क्या इन संचालकों को कानून का कोई खौफ नहीं? पुलिस प्रशासन के लिए सिरदर्द का टाइम बम सीडीएफ चौकी क्षेत्र के ये पूल किसी भी दिन पुलिस के लिए गले की हड्डी बन सकते हैं। अगर रठगाँव या छेरत के किसी पूल में कोई हादसा हुआ, तो जवाबदेही किसकी होगी? पुलिस की चुप्पी से साफ है कि या तो सिस्टम सोया हुआ है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल चल रहा है। रील बनाने के चक्कर में युवा अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, और पुलिस रस्म अदायगी वाली गश्त करके लौट जाती है। जागिए इंचार्ज साहब! पानी सिर से ऊपर जा रहा है इलाके के ग्रामीण डरे हुए हैं कि कहीं ये मौज-मस्ती उनके बच्चों के लिए जानलेवा न साबित हो। अगर समय रहते इन अवैध पूलों की जांच नहीं हुई और संचालकों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक सुस्ती अलीगढ़ पुलिस की साख पर बड़ा धब्बा लगा सकती है। बेबाक राय इंचार्ज साहब, रठगाँव से लेकर मंजूरगढ़ी तक के इन नीले गड्ढों को देखिये, इससे पहले कि कोई रील शोक संदेश में बदल जाए। आपकी खामोशी अवैध संचालकों के लिए ऑक्सीजन का काम कर रही है। जागिए, वरना ये मौन बहुत महंगा पड़ेगा। ईएमएस/धर्मेन्द्र राघव/ 27 अप्रैल 2026