राष्ट्रीय
27-Apr-2026
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:: अंतरराष्ट्रीय मेले ‘फोयर डे पेरिस’ में नेशनल अवार्डी बिलाल खत्री दिखाएंगे हस्तशिल्प का जादू :: इंदौर/धार (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को वैश्विक स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। धार जिले की विश्व प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला अब फ्रांस की राजधानी पेरिस में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है। 30 अप्रैल से 11 मई 2026 तक पेरिस के पोर्टे डे वर्साय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेले फोयर डे पेरिस में इस कला का प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों के तहत, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय ने देशभर से पांच श्रेष्ठ शिल्पकारों का चयन किया है। इस सूची में मध्य प्रदेश के नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री शामिल हैं। वे इस मेले में मास्टर क्राफ्ट्समैन के रूप में प्रदेश की गौरवशाली बाग प्रिंट कला का प्रतिनिधित्व करेंगे। उल्लेखनीय है कि बाग प्रिंट हस्तशिल्प पहले से ही जीआई टैग के अंतर्गत संरक्षित है। :: लाइव प्रदर्शन से रूबरू होंगे अंतरराष्ट्रीय दर्शक :: मेले के दौरान मोहम्मद बिलाल खत्री द्वारा बाग प्रिंट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय दर्शक प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से कपड़ों पर बाग प्रिंट को जीवंत होते हुए देख सकेंगे। यह प्रदर्शन न केवल कला की बारीकियों को उजागर करेगा, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत से दुनिया को रूबरू कराएगा। :: यूरोपीय बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किए गए डिजाइन :: इस विशेष प्रदर्शनी के लिए बाग प्रिंट में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा समन्वय किया गया है। यूरोपीय बाजार के सौंदर्यबोध और पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए ये नए डिजाइन बाग प्रिंट को अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में एक नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होंगे। :: 400 साल पुरानी है समृद्ध सांस्कृतिक विरासत :: मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की यह पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला लगभग 400 वर्ष पुरानी है। खत्री समुदाय द्वारा सिंध के लरकाना से आकर स्थापित की गई यह कला आज एक वैश्विक पहचान बन चुकी है। इसमें धवाड़ी फूल, मायरोबालन, फिटकरी और एलिज़ारिन जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। लाल और काले रंगों में उकेरे गए ज्यामितीय और पुष्पीय रूपांकन इस कला की विशिष्ट पहचान हैं। बहते पानी में धुलाई और धूप में सुखाने की पारंपरिक प्रक्रिया ही इन वस्त्रों को एक अलग चमक और फिनिश प्रदान करती है। प्रकाश/27 अप्रैल 2026