राष्ट्रीय
27-Apr-2026


पटना (ईएमएस)। बिहार में प्रस्तावित 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं में किसानों को स्टेकहोल्डर बनाया जाएगा। जिन किसानों की जमीन इस परियोजना के लिए ली जाएगी, उन्हें विकसित टाउनशिप में उनकी जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा वापस दिया जाएगा। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत कोई भी किसान भूमिहीन नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में टाउनशिप विकसित की जाएगी, वहां जमीन की कीमतें 10 गुना तक बढ़ने की संभावना है। आधुनिक सुविधाओं और बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण किसानों की संपत्ति का मूल्य भी बढ़ेगा। प्रधान सचिव के अनुसार परियोजना का पूरा ड्राफ्ट किसानों के साथ साझा किया जाएगा और उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। विवादित मामलों के निपटारे के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन भी किया जाएगा। योजना के तहत 22 प्रतिशत जमीन सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में उपयोग होगी, जबकि 5 प्रतिशत भूमि पार्क, हरियाली और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित रहेगी। वहीं 3 प्रतिशत जमीन आर्थिक रूप से कमजोर स्थानीय लोगों और भूमिहीन हुए परिवारों के आवास के लिए दी जाएगी। शेष 15 प्रतिशत भूमि का उपयोग परियोजना लागत की वसूली के लिए किया जाएगा। यदि कोई किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं होता है, तो पहले सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्हें बाजार दर पर मुआवजा और टीडीआर देने का विकल्प भी मिलेगा। यदि इसके बाद भी सहमति नहीं बनती है, तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें बाजार मूल्य से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा। विनय कुमार ने बताया कि प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से बचाना है, ताकि वे अपनी जमीन कम कीमत पर बेचने को मजबूर न हों। योजना पूरी होने के बाद किसान अपनी विकसित संपत्ति को बेहतर कीमत पर बेचने या उपयोग करने के हकदार होंगे। सुबोध/२७ -०४-२०२६