इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने एमओएस पर संपत्ति कर लगाने और बकाया राशि की वसूली को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट सुनवाई दौरान मौखिक तौर पर सवाल उठाया कि जब संपत्ति का उपयोग ही नहीं हो रहा है तो उस पर टैक्स किस बात का लिया जा रहा है। इस पर जवाब देने के लिए सरकार ने समय मांगा तो कोर्ट ने समय देते सुनवाई की अगली तारीख 5 मई नियत कर दी। नगर निगम द्वारा एमओएस पर संपत्ति कर लगाने और बकाया राशि की वसूली को लेकर उसके खिलाफ यह जनहित याचिका संजय गोयल द्वारा दायर की गई है। एडवोकेट मीना चापेकर के अनुसार इस जनहित याचिका में कहा गया है कि नगर निगम दावा करता है कि 2020 में संपत्ति कर के नियमों में राज्य सरकार ने संशोधन किया था। इसमें निर्माण के सामने खाली छोड़ी जाने वाली जगह मार्जिनल ओपन स्पेस (एमओएस) पर भी टैक्स लगाया गया है। हालांकि राज्य सरकार ने ऐसा कोई बदलाव टैक्स नियमों में नहीं किया है। इसके बावजूद निगम इसे अब लागू करने के साथ जनता से 2020 के बाद से अब तक की राशि को बकाया बताकर वसूल रहा है। इस वसूली पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने याचिका पर गत सुनवाई उपरांत निगम को संक्षिप्त जवाब पेश करने के लिए कहा था। जिसके बाद कल सुनवाई दौरान कोर्ट ने निगम के वकील से कहा कि एमओएस का मतलब ही मार्जिनल ओपन स्पेस होता है तो जिस खुली जगह का उपयोग ही नहीं हो रहा है तो फिर टैक्स किस बात का ले रहे हो। इस पर सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने अपना जवाब तैयार कर लिया है, जिसे कोर्ट में दाखिल करना बाकी है। इसके लिए उन्हें समय चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सरकार और निगम के जवाब का अध्ययन कर अगली सुनवाई पर अपनी बात रखने का कह सुन्दर 5 मई नियत की। आनंद पुरोहित/ 28 अप्रैल 2026