* शहरी इलाकों में भाजपा मजबूत, जूनागढ़ में आप का असर; ग्रामीण क्षेत्रों में रिकॉर्ड मतदान से बदला सियासी समीकरण अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात की स्थानीय निकायों के चुनावों के शुरुआती परिणामों में भाजपा का प्रभाव एक बार फिर स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों और कई ग्रामीण इलाकों में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने जूनागढ़ जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। कांग्रेस भी कुछ इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये नतीजे राज्य की आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बड़े संकेत माने जा रहे हैं। गुजरात में स्थानीय निकायों के लिए कराए गए इस महत्वपूर्ण चुनाव की मतगणना 28 अप्रैल 2026 को राज्यभर में शुरू हुई। 26 अप्रैल को हुए मतदान में राज्य की 15 महानगरपालिकाओं, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों, 260 तालुका पंचायतों तथा खाली पड़ी 11 नगरपालिकाओं की 13 सीटों के लिए वोट डाले गए थे। चुनावी माहौल को देखते हुए इस मुकाबले को आगामी विधानसभा चुनावों की “सेमीफाइनल” के रूप में देखा जा रहा था, इसलिए सभी दलों की नजरें इन परिणामों पर टिकी हुई हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा को सबसे अधिक फायदा शहरी क्षेत्रों में मिलता दिखाई दे रहा है। अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, वडोदरा जैसे प्रमुख शहरों में पार्टी ने मजबूत पकड़ बरकरार रखी है। इसके अलावा कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा उम्मीदवारों को जनता का समर्थन मिलता दिखा है। इससे स्पष्ट है कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और जमीनी पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। दूसरी ओर, आप ने जूनागढ़ और कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रभावशाली प्रदर्शन कर यह संकेत दिया है कि वह गुजरात की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश में लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में आप ने राज्य में सक्रियता बढ़ाई है और इन चुनावों में उसका असर देखने को मिल रहा है। यदि यह प्रदर्शन जारी रहता है, तो भविष्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है। कांग्रेस भी पूरी तरह पीछे नहीं दिख रही है। कई नगरपालिकाओं और पंचायत क्षेत्रों में पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कुछ सीटों पर कड़ा मुकाबला किया है। हालांकि, राज्य में लंबे समय से कमजोर स्थिति झेल रही कांग्रेस के लिए यह चुनाव संगठन को पुनर्जीवित करने का अवसर माना जा रहा है। मतदान प्रतिशत पर नजर डालें तो शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक उत्साह देखने को मिला। महानगरपालिकाओं में 49.02 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जबकि नगरपालिकाओं में 59.50 प्रतिशत मतदान हुआ। उपचुनावों में 55.38 प्रतिशत मतदान हुआ। जिला पंचायतों में 61.69 प्रतिशत और तालुका पंचायतों में 62.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि गांवों में मतदाता अधिक सक्रिय और उत्साहित रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों के ये नतीजे केवल नगर प्रशासन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाले संकेतक भी हैं। भाजपा जहां अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं आप नई चुनौती के रूप में उभर रही है और कांग्रेस वापसी की उम्मीद में संघर्षरत है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे अंतिम परिणाम सामने आएंगे, गुजरात की राजनीति की तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी। सतीश/28 अप्रैल