राष्ट्रीय
28-Apr-2026


* घर के आंगन से साढ़े तीन साल की बच्ची को उठा ले गई शेरनी, 4 घंटे बाद वन विभाग ने पकड़ा गिर सोमनाथ (ईएमएस)| जिले में गिर क्षेत्र से सटे ऊना तालुका के डमासा गांव में सोमवार शाम एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई। गांव में रहने वाले मजदूर परिवार की साढ़े तीन वर्षीय मासूम बच्ची पर अचानक शेरनी ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल फैल गया है। मिली जानकारी के अनुसार, गांव के वाड़ी क्षेत्र में रहने वाले मजदूर जीवाभाई पामक की बेटी हेमांशी अपनी मां सविताबेन के साथ घर की आंगन में बैठी थी। उसी दौरान मां अपने छोटे बेटे को बुखार की दवा दे रही थी। तभी अचानक एक शेरनी घर में घुस आई और पलभर में बच्ची पर हमला कर उसे खींचकर ले गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने शोर मचाकर बच्ची की तलाश शुरू की। लोगों की आवाज सुनकर शेरनी पास के खेत की ओर भाग गई। करीब 400 मीटर दूर खेत के पास बच्ची का शव मिला। यह दृश्य देखकर गांव में मातम छा गया। घटना की सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग की टीम देर से मौके पर पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। गांव के रास्ते में वाहनों की भीड़ होने के कारण विभागीय वाहन तुरंत घटनास्थल तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने मिलकर बच्ची के शव को झोली में रखकर पैदल दूर तक ले जाकर वाहन तक पहुंचाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इस दौरान परिवारजनों ने विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से शेरों और तेंदुओं की आवाजाही बढ़ गई है, लेकिन पर्याप्त पेट्रोलिंग और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्ची के पिता अपनी बेटी के शव के पास बैठकर बिलखते रहे। यह दर्दनाक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। घटना के बाद नायब वन संरक्षक विकास यादव और सहायक वन संरक्षक कपिल भाटिया के मार्गदर्शन में जसाधार रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के.सी. चौहान ने पांच टीमों का गठन कर पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। पशु चिकित्सक डॉ. पियूष मालवी की मौजूदगी में करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद शेरनी को पिंजरे में कैद कर लिया गया। बाद में उसे जसाधार एनिमल केयर सेंटर ले जाया गया। वन विभाग ने भविष्य में जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है, लेकिन घटना के बाद डमासा गांव और आसपास के क्षेत्रों में अब भी भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सतीश/28 अप्रैल