वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध को तुरंत समाप्त करने का घरेलू दबाव तेजी से बढ़ रहा है। युद्ध के लंबा खिंचने और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश के भीतर उनकी लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिकी जनता और राजनीतिक विश्लेषक युद्ध को लेकर ट्रंप की बदलती दलीलों पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार है। सबसे बड़ा मतभेद इस बात पर अटका है कि पहले युद्धविराम लागू किया जाए या ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा शुरू की जाए। जब तक इन बुनियादी मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक न तो तेल बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है और न ही युद्ध थमने के आसार नजर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखी जा रही है। इस उछाल की मुख्य वजह तेल की वैश्विक आपूर्ति में आ रही गंभीर बाधाएं हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशकों और ट्रेडर्स पर राजनीतिक बयानों का असर कम हो गया है और उनका पूरा ध्यान तेल की वास्तविक आवाजाही पर टिक गया है। मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, इस समय पूरी दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, क्योंकि वहां से होने वाली तेल की सप्लाई लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। शिपिंग आंकड़ों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में ईरान का कच्चा तेल लेकर जा रहे कम से कम छह टैंकरों को अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के कारण अपना रास्ता बदलकर वापस लौटना पड़ा है। इस सैन्य हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भारी दबाव डाल दिया है। आंकड़ों की तुलना करें तो युद्ध शुरू होने से पहले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से प्रतिदिन लगभग 125 से 140 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या चिंताजनक रूप से घट गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान इस रास्ते से केवल सात जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई और गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी जहाज वैश्विक बाजार के लिए तेल नहीं ले जा रहा था। ईरान ने अमेरिकी नौसेना की इस कार्रवाई को खुली लूट करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। वीरेंद्र/ईएमएस/28अप्रैल2026 ---------------------------------