28-Apr-2026
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-सीजेआई ने जजों पर टिप्पणियां करने वाले वकील को लगाई जमकर फटकार नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेाई सूर्यकांत की पीठ वाली बेंच एक वकील पर नाराज हो गई। पीठ ने जजों के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले इस वकील को जमकर फटकार लगाई। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव में अयोग्यता को चुनौती देने वाली कुछ वकीलों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। वकीलों ने संशोधित योग्यता के मानदंड पूरे ना करने पर चुनाव लड़ने से रोके जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि एक याचिकाकर्ता ने बार काउंसिल चुनाव की निगरानी के लिए कोर्ट द्वारा बनाई गई कमिटी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। इस कमिटी की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस सुधांशु धूलिया कर रहे हैं। कोर्ट ने इन टिप्पणियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने गलत, निराधार और आपत्तिजनक आरोप लगाए हैं और वह कोर्ट से किसी राहत का हकदार नहीं हैं। बेंच ने कहा कि कोर्ट ऐसे वकीलों के लिए अपने दरवाजे नहीं खोल सकता, जो अपने काले कोट का गलत इस्तेमाल करते हैं। सुनवाई में सीजेआई ने कहा कि हमें इस याचिकाकर्ता का वेबसाइट या फेसबुक दिखाइए और बताइए कि अभी उसके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए और उसे तुरंत गिरफ्तार क्यों न किया जाए। वो खुद को बहुत चालाक समझते हैं और कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। दूसरे याचिकाकर्ता को भी हमारे सामने पेश करो। ज्यादा ओवरस्मार्ट मत बनिए जैसे हमें पता ही न हो कि क्या चल रहा है।” पीठ ने कहा कि इसने जस्टिस सुधांशु धूलिया और कमिटी के अन्य सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है और बदनाम करने वाले आरोप लगाए हैं। हम इस याचिका को एक लाख के जुर्माने के साथ खारिज करते हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कोर्ट को बताया कि जिस वकील ने आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, वह अब इस मामले में याचिकाकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति अब इस याचिका का हिस्सा नहीं है और उनके बयान का समर्थन नहीं किया जाता। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि वह इसलिए नहीं है, क्योंकि उसे पता है कि हम उसे पकड़ चुके हैं। एक अन्य वकील सिद्धार्थ आर गुप्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि बाकी याचिकाकर्ताओं को राहत से वंचित न किया जाए और सभी को एक जैसा न माना जाए। उन्होंने कहा कि सभी को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया और किसी भी याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया। सीजेआई ने कहा कि हम किसी तरह की छूट देने का कोई कारण नहीं देखते। हम उन लोगों के लिए यह रास्ता नहीं खोलेंगे जो सिस्टम का गलत इस्तेमाल करते हैं। ये लग्जरी लिटिगेशन हैं। सिराज/ईएमएस 28अप्रैल26

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राष्ट्रीय फोटो - टीएमसी और बीजेपी चुनाव चिंह फैलादी सट्टा बाजार में दीदी की वापसी, जबकि भविष्यवाणी मंच में बीजेपी को बढ़त कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माया हुआ है। पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के मतदान की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि राज्य की सत्ता इस बार किसके हाथ में जाएगी। क्या सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी या बीजेपी इतिहास रचते हुए सत्ता परिवर्तन करेगी? हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार सभी चरणों के मतदान समाप्त होने से पहले किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल या सर्वे जारी करना प्रतिबंधित है। चुनाव आयोग ने 9 से 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक इस पर सख्त रोक लगाई है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126ए के तहत यह प्रतिबंध कानूनी रूप से लागू है और उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी है। मुख्यधारा की मीडिया संस्थाए