राष्ट्रीय फोटो - टीएमसी और बीजेपी चुनाव चिंह फैलादी सट्टा बाजार में दीदी की वापसी, जबकि भविष्यवाणी मंच में बीजेपी को बढ़त कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माया हुआ है। पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के मतदान की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि राज्य की सत्ता इस बार किसके हाथ में जाएगी। क्या सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी या बीजेपी इतिहास रचते हुए सत्ता परिवर्तन करेगी? हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार सभी चरणों के मतदान समाप्त होने से पहले किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल या सर्वे जारी करना प्रतिबंधित है। चुनाव आयोग ने 9 से 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक इस पर सख्त रोक लगाई है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126ए के तहत यह प्रतिबंध कानूनी रूप से लागू है और उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी है। मुख्यधारा की मीडिया संस्थाए

28-Apr-2026
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फैलादी सट्टा बाजार में दीदी की वापसी, जबकि भविष्यवाणी मंच में बीजेपी को बढ़त कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माया हुआ है। पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के मतदान की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि राज्य की सत्ता इस बार किसके हाथ में जाएगी। क्या सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी या बीजेपी इतिहास रचते हुए सत्ता परिवर्तन करेगी? हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार सभी चरणों के मतदान समाप्त होने से पहले किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल या सर्वे जारी करना प्रतिबंधित है। चुनाव आयोग ने 9 से 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक इस पर सख्त रोक लगाई है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126ए के तहत यह प्रतिबंध कानूनी रूप से लागू है और उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी है। मुख्यधारा की मीडिया संस्थाएं इस नियम का पालन कर रही हैं, लेकिन सोशल मीडिया और सट्टा बाजार में तरह-तरह के अनुमान सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई अनौपचारिक पोल और सर्वे तेजी से वायरल हुए हैं इसमें एक दिलचस्प रुझान देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग भाजपा के पक्ष में परिणाम जाते हुए दिखा रहे हैं। हालांकि इन सर्वे की विश्वसनीयता संदिग्ध मानी जाती है, फिर भी इन्हें जनभावना के संकेतक के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच राजस्थान के चर्चित फलौदी सट्टा बाजार ने भी अपने अनुमान जारी कर दिया हैं। इसके अनुसार मुकाबला काफी कड़ा रहने वाला है। जहां तृणमूल कांग्रेस को करीब 158 से 161 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 127 से 130 सीटों के बीच समर्थन मिलने की संभावना है। कांग्रेस और वाम दलों को इस दौड़ में काफी पीछे माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस चुनाव में दिलचस्पी दिखाई दे रही है। वैश्विक भविष्यवाणी मंच पोलीमार्कट के आंकड़े भाजपा को बढ़त दिखा रहे हैं। यहां भाजपा को करीब 57 और तृणमूल कांग्रेस को करीब 43 प्रतिशत जीत की संभावना दी गई है। इससे पहले के अनुमानों में भी भाजपा को हल्की बढ़त दिखाई गई थी। जमीनी स्तर पर चुनावी स्थिति बेहद रोचक बनी हुई है। तृणमूल कांग्रेस को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है, खासकर शहरी क्षेत्रों और युवाओं में कुछ असंतोष दिख रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में पार्टी की मजबूत पकड़ और महिला मतदाताओं के बीच उसका प्रभाव टीएमसी को अभी भी एक मजबूत दावेदार बनाए हुए है। वहीं भाजपा ने हाल के वर्षों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत की है और अब वह प्रमुख विपक्ष के रूप में उभरी है। विकास, पहचान और सुरक्षा जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर पार्टी चुनावी रणनीति बना रही है। उत्तर बंगाल और सिलीगुड़ी क्षेत्र में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है, जहां उसे बढ़त मिलने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। बहरहाल, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव बेहद रोचक और करीबी मुकाबले का संकेत दे रहा है। आधिकारिक एग्जिट पोल भले ही अभी सामने नहीं आए हों, लेकिन सोशल मीडिया, सट्टा बाजार और अंतरराष्ट्रीय आकलनों के संकेत एक इसतरह चुनाव की ओर इशारा कर रहे हैं जहां हर सीट का महत्व बेहद अधिक होगा। सबकी नजर 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि बंगाल की सत्ता की कुर्सी पर आखिर कौन बैठेगा। आशीष दुबे / 28 अप्रैल 2026