- कलेक्टर ने मौके पर पकड़ा खेल, बाबू सस्पेंड गुना (ईएमएस) । मंगलवार की जनसुनवाई में आंगनवाड़ी भर्ती से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। मेरिट में चयनित महिलाओं की जगह फाइलों में नाम बदलकर दूसरी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की कोशिश की जा रही थी। मामला सामने आते ही कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने तत्काल जांच कराई, मौके पर ही गड़बड़ी पकड़ी और संबंधित बाबू को निलंबित कर दिया। साथ ही पीड़ित महिला को वहीं नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया। जानकारी के अनुसार राघौगढ़ परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र नांदनेर तरी में सहायिका पद पर पूजा कुशवाह तथा मधुसूदनगढ़ के तिलक चौक वार्ड क्रमांक-4 में रानी सेन का चयन मेरिट के आधार पर हुआ था। लेकिन सहायक ग्रेड-03 विजय कुमार मेहरा द्वारा नस्ती में हेरफेर करते हुए पूजा कुशवाह की जगह पूनम कुशवाह और रानी सेन की जगह रजनी सेन का नाम डालकर अनुमोदन के लिए फाइल आगे बढ़ा दी गई। मामला तब खुला जब चयनित अभ्यर्थी रानी सेन जनसुनवाई में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि चयन होने के बावजूद उन्हें दो महीने तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला। जब दस्तावेज सत्यापन के दौरान जानकारी ली तो पता चला कि अन्य लोगों को लेटर मिल चुके हैं, जबकि उनका रोका गया है। इस दौरान एक व्यक्ति ने उनसे पैसे मांगकर नियुक्ति दिलाने की बात भी कही। कलेक्टर ने मौके पर ही जांच कराई तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। कलेक्टर किशोर कन्याल ने बताया कि यह गड़बड़ी सुनियोजित तरीके से की गई थी, जिसमें जानबूझकर नाम बदले गए। उन्होंने तुरंत सही अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी किया और दोषी बाबू को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। तकनीकी रूप से यह भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया से होती है, जिसमें दस्तावेज अपलोड और मेरिट के आधार पर चयन होता है। इसके बावजूद फाइल स्तर पर हेरफेर कर सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उल्लेखनीय है कि संबंधित कर्मचारी द्वारा सीपीसीटी प्रमाण पत्र भी निर्धारित समय में प्रस्तुत नहीं किया गया था, जिसे भी गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को तत्काल न्याय मिल गया। -सीताराम नाटानी