वाराणसी (ईएमएस)। प्रख्यात साहित्यकार, कवि, शिक्षाविद् एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ राजीव कुमार दुबे को उनके साहित्य एवं गीता दर्शन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रतिष्ठित भारत विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पंजाब विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री कुलतार सिंह संधावा जी के द्वारा 28 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब विधानसभा में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में प्रदान किया गया। डॉ. दुबे को यह सम्मान भारतीय साहित्य, आध्यात्मिक चिंतन तथा श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेशों के प्रचार-प्रसार में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रदान किया गया। उनकी रचनाएँ आध्यात्मिक चेतना, आत्मबोध, राष्ट्रीय भावना तथा नैतिक जीवन मूल्यों को समर्पित रही हैं और उन्होंने गीता के शाश्वत संदेशों को आधुनिक समाज तक सरल एवं प्रभावशाली शैली में पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। डॉ. दुबे की चर्चित कृतियों में ‘गीता सुगीता कर्तव्या’ तथा ‘गीता: वर्सेज ऑफ इटर्निटी’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने भगवद्गीता के गूढ़ आध्यात्मिक दर्शन को काव्यात्मक एवं समकालीन शैली में प्रस्तुत कर पाठकों को आत्मचिंतन, कर्तव्यनिष्ठा और आध्यात्मिक उन्नयन की प्रेरणा दी है। इस अवसर पर डॉ. दुबे ने इस सम्मान के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे साहित्य प्रेमियों, आध्यात्मिक साधकों तथा समाज में सत्य, करुणा और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को जीवित रखने वाले सभी लोगों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता का संदेश आज भी मानवता को कर्तव्य, समत्व और आत्मजागरण का मार्ग दिखाता है। साहित्य के अतिरिक्त डॉ. दुबे चिकित्सा, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। पंजाब विधानसभा में आयोजित इस सम्मान समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही, जिन्होंने डॉ. दुबे के बहुआयामी योगदान की सराहना की। डॉ नरसिंह राम/28/04/2026