मौजूदा रक्षा प्रणाली आधुनिक मिसाइलों के सामने है कमजोर, पेंटागन का खुलासा... चीन-रूस की मिसाइलों के सामने अमेरिकी रक्षा सिस्टम बेदम मिडिल ईस्ट जंग में ईरान पड़ा भारी! वाशिंगटन (ईएमएस) । मिडिल ईस्ट जंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। ईरान की ताकत में इजाफा होता जा रहा है। वहीं रूस-चीन और कई अन्य देश युद्ध को रोकने को लेकर ईरान के समर्थन में आ गए हैं। इस बीच पेंटागन ने ट्रंप की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। शीर्ष पेंटागन अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि मौजूदा अमेरिकी रक्षा प्रणाली केवल छोटे स्तर के हमलों को ही रोक सकती है और हाइपरसोनिक या क्रूज मिसाइल जैसे आधुनिक खतरों के खिलाफ लगभग बेअसर है। अमेरिकी रक्षा और सैन्य अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2027 के बजट पर चर्चा के दौरान सीनेट में यह बात रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश तेजी से ऐसे हथियार विकसित कर रहे हैं, जो पारंपरिक रक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा दे सकते हैं। ऐसे में अमेरिका के ऊपर आंतरिक रूप से दबाव बढ़ रहा है कि वह ईरान के साथ वार्ता कर जंग को टाले, अन्यथा इसके परिणाम अमेरिका सहित पूरे विश्व के लिए घातक होंगे। अमेरिका की जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, इजराइल कमजोर हुआ है, उससे ट्रंप पहली बार बेबस नजर आ रहे हैं। वहीं खाड़ी के देश भी अब युद्ध रोकने अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं। उधर, अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मार्क जे बर्कविट्ज ने साफ कहा कि मौजूदा सिस्टम को इस तरह के आधुनिक खतरों के लिए डिजाइन ही नहीं किया गया था। ट्रंप ईरान युद्ध से परेशान हो गए हैं। अमेरिका को शीतयुद्ध की तरह लंबी लड़ाई में फंसने का डर है। क्योंकि, ईरान उन मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता है, जिस पर ट्रंप समझौता चाहते हैं। ट्रंप ने अपने एक सलाहकार से कहा है कि ईरान वाले सिर्फ बम चलाना जानते हैं। उन्हें समझौते से कोई मतलब नहीं है। 1 मई को ईरान युद्ध पर ट्रंप को बड़ा फैसला लेना है। अगर वे युद्ध को बढ़ाना चाहेंगे तो उन्हें इसके लिए प्रस्ताव लाना होगा। पिछले दिनों ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि हम वियतनाम में 18 साल तक रहे थे। उधर, ईरान को लेकर सिचुएशन रूम की बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रक्षा मंत्रालय पेंटागन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। वेंस ने कहा कि पेंटागन झूठ बोल रहा है। राष्ट्रपति को पूरी जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे युद्ध को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। अटलांटिक मैगजीन ने सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट की है। बैठक में वेंस ने ट्रंप से कहा कि हमारे पास हथियार खत्म हो रहे हैं। आने वाले वक्त में अगर चीन और नॉर्थ कोरिया कुछ करता है तो हम उसका जवाब नहीं दे पाएंगे। वेंस का यह मुखर विरोध ऐसे वक्त में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति यह फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि ईरान को लेकर आगे क्या किया जाए? अमेरिका के पास केवल एक-स्तरीय रक्षा प्रणाली अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मार्क जे बर्कविट्ज ने कहा कि अमेरिका के पास केवल सीमित, जमीन आधारित एक-स्तरीय रक्षा प्रणाली है। यह सिर्फ छोटे हमलों के लिए बनाई गई थी। हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कोई प्रभावी सुरक्षा नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि खासतौर पर चीन तेजी से हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जो पारंपरिक इंटरसेप्टर सिस्टम से बच निकलती हैं। इससे अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा गैप सामने आया है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल ए गुएटलीन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब स्थिति बदल चुकी है और अमेरिका की सुरक्षा पहले जैसी मजबूत नहीं रही। गोल्डन डोम- अमेरिका की नई रक्षा योजना इन खतरों से निपटने के लिए अमेरिका एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना गोल्डन डोम पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत अंतरिक्ष आधारित सेंसर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जमीन और समुद्र आधारित इंटरसेप्टर तैनात होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमांड और कंट्रोल सिस्टम होगा। नई तकनीकों जैसे डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (लेजर आदि) का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 175 से 185 अरब डॉलर (करीब 14-15 लाख करोड़ रुपये) बताई जा रही है और 2028 तक इसकी शुरुआती क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं और इसके लिए करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट का समर्थन किया जा रहा है। रक्षा उत्पादन में भी बड़ी कमजोरी अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी के निदेशक हीथ ए कोलिन्स ने कहा कि वर्षों की कम निवेश नीति से रक्षा उत्पादन क्षमता कमजोर हो गई है। इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन में कैपेसिटी डेब्ट बन गया है। सप्लाई चेन को मजबूत करने में समय लगेगा। उन्होंने चेताया कि अगर बड़े पैमाने पर युद्ध होता है, तो अमेरिका के लिए लंबे समय तक रक्षा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ तेज इस महंगे गोल्डन डोम प्रोजेक्ट को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। सीनेटर एंगस किंग ने सवाल उठाया कि इतने बड़े खर्च वाले कार्यक्रम में कांग्रेस की निगरानी को सीमित क्यों किया जा रहा है, जबकि यह राष्ट्रीय बजट पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल चुका है और अब केवल डिटरेंस यानी डर के सहारे सुरक्षा संभव नहीं रह गई है। उनका तर्क है कि आज कई परमाणु ताकतें सक्रिय हैं, मिसाइल तकनीक पहले से कहीं ज्यादा उन्नत हो चुकी है और साइबर व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे नए खतरे भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में अमेरिका अब डिटरेंस + एक्टिव डिफेंस की संयुक्त रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें हमलों को रोकने के साथ-साथ सक्रिय रूप से उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है। इसके बावजूद अमेरिका फिलहाल अपने मौजूदा रक्षा ढांचे पर ही काफी हद तक निर्भर है, जिसमें एजिस सिस्टम से लैस नौसैनिक जहाज, थाड और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली बनाते हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि भविष्य के जटिल और हाई-टेक खतरों के सामने ये व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो सकती।