राष्ट्रीय
28-Apr-2026
...


-अंग्रेजों के जमाने में कृषि और पुशुओं को संरक्षण? नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में इन दिनों जनगणना को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। अंग्रेजों ने विभिन्न स्तर पर जनगणना के लिए भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत जनगणना का काम पहली बार हिंदुस्तान में किया। विभिन्न आधार पर कई तरह से विस्तृत गणना 1935 में की गई थी। इसके आंकड़ों के आधार पर विकास का मॉडल एवं योजनाएं बनाने का काम शुरु किया था। भारत में पशुधन हमेशा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। वर्ष 1935 की जनगणना के आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि उस समय देश के विभिन्न प्रांतों में गाय, भैंस, भेड़, बकरी और अन्य पशुओं को गणना में शामिल किया गया जो कृषि और परिवहन का प्रमुख आधार थे। उस दौर में संयुक्त राज्य (वर्तमान उत्तर प्रदेश क्षेत्र) में सबसे अधिक लगभग 32,470 गाय-भैंस दर्ज की गईं, जबकि बंगाल और मद्रास जैसे प्रांत भी पशुधन संपदा में समृद्ध थे। 1935 की पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में लगभग 25,287 गाय-भैंस और 6,049 भेड़-बकरियां थीं, वहीं मद्रास में 24,607 गाय-भैंस और 11,701 भेड़-बकरियों की संख्या दर्ज की गई। पंजाब और बम्बई प्रांत भी पशुधन के मामले में समृद्ध थे। उस समय हल और गाड़ियों की संख्या भी काफी अधिक थी, जो दर्शाती है कि कृषि पूरी तरह पशुओं पर निर्भर थी। वर्तमान परिदृश्य में भारत में पशुधन की भूमिका बरकरार है, उसका स्वरूप बदल चुका है। अब ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों ने हल और बैलगाड़ियों की जगह ले ली है, जबकि डेयरी उद्योग और पोल्ट्री फार्मिंग तेजी से विकसित हुए हैं। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है, जहां पशुपालन केवल खेती का सहायक साधन नहीं बल्कि एक स्वतंत्र उद्योग बन चुका है। हालांकि, बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और चरागाहों की कमी के कारण पशुधन पर दबाव भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है, संसाधनों का उपयोग एवं वर्गीकरण सही तरीके से होगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। 1935 के आंकड़े न केवल इतिहास की झलक देते हैं, बल्कि वर्तमान नीतियों और भविष्य की योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। वर्ष 2026 की जनगणना में सरकार को पालतू पशुओं को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। आबादी और पशुधन को भी जाति-वर्ग के आधार पर शामिल किया जाए, इससे भारत का सामाजिक एवं आर्थिक विकास तेज होगा। हिदायत/ईएमएस 28अप्रैल26