लेख
29-Apr-2026
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सौदर्य प्रसाधनों, खिलौनों चिपकने वाली पन्नियों, मेडिकल उपकरणों और यहाँ तक कि सामान्य उपयोग के थैलों में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक गभ॔स्थ शिशुओं के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक खोज में स्पष्ट किया है कि प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले सामान्य रसायन गभं में पल रहे शिशु के लैगिक विकास में काफी दुष्प्रभाव डालते हैं। इस नई खोज ने अमेरिका और यूरोप में पहले से ही बंदिशों का दंश झेल रहे प्लास्टिक उधोग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। उक्त शोध रोचेस्टर विश्वविधालय और नेशनल सेन्टर फांर एनवायरनमेंटल हेल्थ की अगुवाई में अमेरिका भर में फैले केन्दो की मदद से किया गया है। हालांकि यह धारणा नई नहीं है कि प्लास्टिक के निर्माण में उपयोग होने वाले थैलेट समूह के रसायन नर जन्तुओं के लैगिक विकास में विपरीत प्रभाव छोडते है‌। माँ के गभ॔ में रसायनों के संपर्क में आने वाले नर शिशुओं की, वयस्क होने पर वीर्य गुणवत्ता और प्रजनन क्षमता में गिरावट पहले भी सिद्ध की जा चुकी है। नये शोध के अनुसार थैलेट की सामान्य मात्रा जो आम तौर पर सव॑त्र पाई जाती है। नर शिशुओं के जननांगों के विकास को बाधित करती है। शोधकर्ताओं ने थैलेट समूह के सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले 9 रसायनों की गभ॔वती महिलाओं के पेशाब की जांच की। उन्होंने उनके गभ॔स्थ शिशुओं की शारीरिक माप-जोख भी की। परिणामों से साबित हुआ कि जिन महिलाओं चुनिंदा चार थैलेट रसायनों की मात्रा ज्यादा पाई गई, उनके गभ॔ में पल रहे बालक शिशुओं के जननांग विकार ग्रस्त थे। इन दोषों में जननांग व अंडकोष के ठीक से विकसित नहीं होने के अतिरिक्त पेरीनियम (जननांग व गुदाद्वार के मध्य की दूरी) की लंबाई भी कम थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इन शिशुओं में स्त्रयोचित लक्षण प्रकट होने लगे थे। जानवरों पर हुए अध्ययन से यह अवधारणा पहले ही साबित की जा चुकी है। शोधकर्ता डां शाना स्वान बताती है कि गभा॔वस्था में इन रसायनों के संपर्क में आज शिशुओं के वयस्क होने पर पुरुषोंचित गुणों में असर दिखाई पड़ता है और उनके जुझारूपन, पितृत्व व सीखने की क्षमता में भी गिरावट देखी गई है। लंदन स्कूल आफ फामेंसी के पर्यावरण प्रदूषण विशेषज्ञ एन्द्रेस कोटेनकेम्प के मुताबिक प्लास्टिक रसायनों का मनुष्यों पर ऐसा असर साबित होना चिंता जनक है। ये रसायन इतने आम है कि लगभग हर तरह की प्लास्टिक सामग्री में इस्तेमाल किए जाते हैं। इनसे निजात पाना सिर्फ उधोग जगत के लिए ही नहीं बल्कि समाज लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ईएमएस/29/04/2026