सिम सत्यापन से लेकर बैंकिंग निगरानी तक कड़े उपाय नई दिल्ली (ईएमएस)। देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर ठगी के मामलों पर अब केंद्र की मोदी सरकार ने सख्त रुख दिखाया है। इस बढ़ते खतरे को देखकर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर ठगों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों को ब्लॉक करने सहित कई कड़े कदमों का खाका तैयार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, समस्या से निपटने के लिए दूरसंचार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंकिंग तंत्र के बीच समन्वित कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार ने दूरसंचार विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक जैसे प्रमुख संस्थानों को एक साथ काम करने के निर्देश देने की मांग की है, ताकि सुरक्षा उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके। दूरसंचार क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में देखने को मिलेगा। मोदी सरकार ‘बायोमैट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली’ को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल पर रोक लग सके। इसके अलावा, सिम सक्रियण से जुड़े पॉइंट ऑफ सेल (पीएसओ) एजेंटों के लिए भी कड़े सत्यापन और जवाबदेही नियम लागू किए जाएंगे।केंद्र की सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में प्रस्ताव है कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध मोबाइल नंबरों और सिम कार्डों को तुरंत ब्लॉक करे। साथ ही, दूरसंचार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ रियल-टाइम डेटा साझा करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को लेकर भी मोदी सरकार सतर्क है। रिपोर्ट में व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ और उन्नत सुरक्षा तंत्र लागू करने की बात की गई है। इसके तहत संदिग्ध कॉल्स और लंबी धोखाधड़ी वार्ताओं की पहचान कर उन्हें रोका जा सकेगा। साथ ही, स्कैम में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। वित्तीय क्षेत्र में, मोदी सरकार ने बैंक खातों पर तत्काल कार्रवाई के लिए नई व्यवस्था सुझाई है। भारतीय रिज़र्व बैंक की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत संदिग्ध खातों पर अस्थायी डेबिट रोक लगाने का प्रावधान लागू किया जाएगा। इससे धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और जुर्माना या सुरक्षा फीस के नाम पर पैसे ठगते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में इस तरह के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है और इसका शिकार आम नागरिकों से लेकर अधिकारी और बुजुर्ग तक हो रहे हैं। आशीष/ईएमएस 29 अप्रैल 2026