ठाणे, (ईएमएस)। ठाणे जिले की एक अदालत ने अपनी साली के साथ जबरन संबंध बनाने और उसे गर्भवती करने के आरोप में एक 34 वर्षीय व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा, क्योंकि मुख्य गवाह अपने बयान से मुकर गए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस. विठलानी ने आरोपी, जो कलवा का निवासी है, को भारतीय न्याय संहिता की धारा 68(ए), धारा 88 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषमुक्त घोषित किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता वर्ष 2021 में अपनी बड़ी बहन की डिलीवरी के बाद उसकी मदद के लिए आरोपी के घर रहने आई थी। इसी दौरान आरोपी ने कथित रूप से उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और वर्ष 2022 में वह गर्भवती हो गई। बाद में गर्भपात कराया गया। कोर्ट ने कहा कि धारा 68(ए) के तहत अपराध साबित करने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी भरोसे या अधिकार की स्थिति में था और उसने उसी का दुरुपयोग कर पीड़िता को बहकाया या मजबूर किया। अदालत ने पाया कि पीड़िता ने गवाही में कहा कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। वहीं पीड़िता के भाई ने भी कथित उत्पीड़न या गर्भावस्था की जानकारी होने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने पीड़िता को बहकाया, डराया-धमकाया या अपराध किया। इसलिए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। स्वेता/संतोष झा- २९ अप्रैल/२०२६/ईएमएस