राष्ट्रीय
29-Apr-2026
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ग्रीस का एलेक्जेंड्रो पोलीपोट बंदरगाह भारतीय कंपनी को सौंपने की तैयारी नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के दोस्त देश ग्रीस से एक बड़ी खबर सामने आई है। ग्रीस का वहां बंदरगाह जो पूरे यूरोप की धड़कन कहा जाता है। अब भारत की मुट्ठी में आने वाला है। खबर है कि ग्रीस का एलेक्जेंड्रो पोलीपोट अब एक भारतीय कंपनी के अधिकार क्षेत्र में है। भारत की दिग्गज कंपनी बंदरगाह पोलीपोट को खरीदने या इसमें बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने ग्रीस सरकार के साथ बातचीत कर रही है। यह डील सिर्फ बिजनेस के लिहाज से नहीं बल्कि भारत की रणनीतिक ताकत को सात समंदर पार स्थापित करने के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है। पोलीपोर्ट की अहमियत को समझने के लिए इसकी लोकेशन बहुत जरुरी है। यह बंदरगाह बुल्गारिया, रोमानिया और यूक्रेन जैसे देशों के बिल्कुल करीब है। जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है। तब से यह पोर्ट पूरे यूरोप के लिए लाइफ लाइन बन गया है। नाटो देशों के टैंक हो, हथियार हो या फिर अनाज और गैस की सप्लाई हो सब कुछ इसी रास्ते से यूरोप के अंदर जा रहा है। और इसकारण कल तक जिस बंदरगाह को ग्रीस सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर बेचने से रोक दिया था। आज वहीं इसकी चाबी भारत को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ा एंगल चीन और तुर्की का है। ग्रीस का सबसे प्रमुख बंदरगाह पीरिय वर्तमान में पूरी तरह चीन की कंपनी कॉस्को के नियंत्रण में है। ग्रीस और बाकी यूरोपीय देश इस बात को लेकर परेशान है कि अगर उनके सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर चीन का कब्जा रहा, तब भविष्य में उनकी स्वायता खतरे में आ सकती है। भारत की एंट्री ने ग्रीस को एक भरोसेमंद विकल्प दिया है। भारत की छवि एक इसतरह के देश की है जो बिजनेस करता है लेकिन दूसरे देशों की जमीन या संप्रभुता पर कब्जा नहीं करता। वहीं तुर्की की ग्रीस से दुश्मनी किसी से नहीं छुपी और जब तुर्की पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है। भारत का ग्रीस में होना तुर्की को बहुत खटकने वाला। भारत के लिए यह बंदरगाह एक गोल्डन गेट की तरह है क्योंकि भारत काफी समय से इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर आईएमसी पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत के सामान को अरब देशों के रास्ते सीधे यूरोप पहुंचाना है। एलेक्जेंड्रो पोलीपोट कॉरिडोर का वहां आखिरी पड़ाव हो सकता है जहां से भारतीय माल पूरे यूरोप के बाजारों में फैल जाएगा। इससे ना सिर्फ भारत का निर्यात बढ़ेगा बल्कि स्वेज नहर जैसे रास्तों पर भारत की निर्भरता भी कम हो जाएगी। वहीं पोर्ट पर भारत का होना मतलब यूरोप की सप्लाई चेन और सुरक्षा के समीकरणों में भारत की परमानेंट सीट पक्की होगी। ग्रीस कैन रिपोर्ट्स पर जहां रूस और अमेरिका जैसे देशों की नजरें टिकी हैं। वहीं एलेक्जेंड्रो पोली में भारत की दावेदारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। यह डील भारत की उस विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें हम सिर्फ अपने पड़ोस तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। आशीष दुबे / 29 अप्रैल 2026