अंतर्राष्ट्रीय
29-Apr-2026
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-स्टेट डिनर में व्हाइट हाउस से लेकर अमेरिकी संसद तक को दे दिया संदेश -अमेरिका-ब्रिटेन संबंध भविष्य के लिए भी अहम वॉशिंगटन,(ईएमएस)। किंग चार्ल्स ने अमेरिका दौरे के दौरान व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसते हुए दोनों देशों के साझा इतिहास को याद किया। चार्ल्स थर्ड ने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर ब्रिटेन ने इतिहास में अपनी भूमिका न निभाई होती, तो आज अमेरिकी लोग फ्रेंच बोल रहे होते। उनका यह बयान उत्तरी अमेरिका पर कब्जे को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस के बीच हुए ऐतिहासिक संघर्ष की ओर इशारा था। दरअसल, यह टिप्पणी ट्रंप के उस पुराने बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध में हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो यूरोप में लोग जर्मन या जापानी बोल रहे होते। चार्ल्स ने उसी शैली में जवाब देते हुए माहौल को हल्का बनाया, लेकिन साथ ही गहरा संदेश भी दिया। अपने संबोधन में चार्ल्स ने कई ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें बर्निंग ऑफ द व्हाइट हाउस और बॉस्टन टी पार्टी शामिल हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि आज का डिनर “बोस्टन टी पार्टी से कहीं बेहतर” है। चार्ल्स ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और ब्रिटेन का रिश्ता केवल अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भी दोनों देशों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने नाटो जैसे गठबंधनों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। ट्रंप को ब्रिटिश पनडुब्बी की घंटी भेंट इस दौरान उन्होंने ट्रंप को द्वितीय विश्व युद्ध की एक ब्रिटिश पनडुब्बी की घंटी भेंट करते हुए मजाक में कहा कि “अगर हमें बुलाना हो, तो बस घंटी बजा दीजिए।” इससे पहले चार्ल्स ने अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए दोनों देशों के रिश्तों को “इतिहास के सबसे प्रभावशाली गठबंधनों में से एक” बताया। किंग चार्ल्स का दौरा है अहम चार्ल्स ने नेताओं से आत्म-केंद्रित न होने की अपील करते हुए कहा कि यह गठबंधन केवल अतीत की उपलब्धियों पर नहीं टिक सकता, बल्कि वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों के अनुसार इसे और मजबूत करना होगा। चार्ल्स का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच मतभेद भी रहे हैं। ऐसे में उनके इस दौरे को संबंधों को संतुलित और मजबूत करने की कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हिदायत/ईएमएस 29अप्रैल26