नई दिल्ली (ईएमएस)। लद्दाख की राजधानी लेह बुधवार को आस्था और इतिहास का केंद्र बन गई, जब भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष यहां विशेष समारोह के साथ पहुंचाए गए। इन दुर्लभ अवशेषों के आगमन से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह का माहौल है। हवाई अड्डे से लेकर शहर तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। नई दिल्ली से भारतीय वायुसेना के विशेष विमान द्वारा लाए गए इन अवशेषों को लेह एयरपोर्ट पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की मौजूदगी में सम्मानपूर्वक ग्रहण किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के प्रतिनिधि, पूर्व सांसद और कई सामाजिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। समारोह के बाद अवशेषों को भव्य शोभायात्रा के रूप में जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 2 मई से 10 मई तक आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 11 और 12 मई को जंस्कार तथा 13 से 14 मई तक लेह के धर्मा सेंटर में प्रदर्शित किया जाएगा। 15 मई को इन्हें वापस दिल्ली भेजा जाएगा। उपराज्यपाल सक्सेना ने इसे अत्यंत शुभ अवसर बताते हुए कहा कि इन पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा लद्दाख धन्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब भारत में मूल संरक्षण स्थल से बाहर इन अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए लाया गया है। गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, राजदूत और बौद्ध बहुल राज्यों के मुख्यमंत्री भी दर्शन के लिए लेह पहुंच सकते हैं। सुबोध/२९ -०४-२०२६