राष्ट्रीय
29-Apr-2026


प्रयागराज (ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि आयोग मुसलमानों पर हमलों जैसे गंभीर मामलों की अनदेखी कर रहा है और उन विषयों में दखल दे रहा है जो उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के एनएचआरसी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ कर रही थी। जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि मानवाधिकार आयोग उन मामलों में सक्रिय दिखता है जो सामान्यतः हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आयोग भीड़ हिंसा, मॉब लिंचिंग, अंतरधार्मिक संबंधों को लेकर उत्पीड़न और समुदाय विशेष पर हमलों के मामलों में स्वत: संज्ञान क्यों नहीं लेता। न्यायालय ने कहा कि कई मामलों में मुसलमानों पर हमले होते हैं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं होते या जांच सही ढंग से नहीं की जाती। ऐसे मामलों में आयोग की सक्रियता दिखाई नहीं देती। हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन टिप्पणियों से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान एनएचआरसी का पक्ष मौजूद नहीं था, इसलिए सभी पक्षों को सुने बिना प्रतिकूल टिप्पणी से बचना चाहिए था। खंडपीठ ने एनएचआरसी को नोटिस जारी करते हुए उसके आदेश पर लगी अंतरिम रोक बढ़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी। सुबोध/२९ -०४-२०२६