राज्य
30-Apr-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यूके में रहने वाले एक पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने नाबालिग बच्चे को भारत से वापस ब्रिटेन भेजने की मांग की थी। पिता का आरोप था कि उसकी पत्नी बच्चे को 2023 में बिना उसकी अनुमति के भारत लेकर आ गई थी, जो इंग्लैंड की फैमिली कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 29 अप्रैल को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि बच्चा, जो 2023 में 9 साल का था, अब भारत में अपनी मां के साथ रहना चाहता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बच्चे को यूके भेज दिया जाता है और मां को वहां रहने की अनुमति नहीं मिलती, तो बच्चे को लंबे समय तक अपनी मां से दूर रहना पड़ सकता है, जिससे उसे अपूरणीय भावनात्मक नुकसान हो सकता है। अदालत ने यह भी माना कि मां को यूके लौटने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उसका वीजा रद्द कर दिया गया था और जुलाई 2023 में उसे देश छोड़ने के लिए कहा गया था। साथ ही, बच्चे को भारत में अच्छी शिक्षा मिल रही है और मां के साथ उसका रहना अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिता भारत आकर अपने बच्चे से मिल सकता है। मामले के अनुसार, दंपति की शादी 2008 में हुई थी और वे अमेरिका में रहते थे, जहां 2014 में उनके बच्चे का जन्म हुआ। 2019 में पिता को यूके में नौकरी मिलने पर पूरा परिवार वहां शिफ्ट हो गया। 2021 में दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ और पिता का आरोप है कि मां बच्चे को उसकी जानकारी के बिना भारत ले आई। मां ने बांद्रा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की है और पिता को बच्चे को ले जाने से रोकने की मांग की है। हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को बच्चे से व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की, जिसमें बच्चे ने भारत में रहने की इच्छा जताई और पिता से संवाद बनाए रखने की बात कही। अदालत ने यह भी माना कि यूके में मां की स्थिति अनिश्चित है और वह वहां पिता पर निर्भर रह सकती है। साथ ही, मां का यह भी आरोप था कि पिता बच्चे के अमेरिकी पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवश्यक सहमति नहीं दे रहा है, जिससे स्थिति और जटिल हो रही है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पिता की याचिका खारिज कर दी। - ३० अप्रैल/२०२६/ईएमएस