मुंबई, (ईएमएस)। महाराष्ट्र में सड़क हादसों की स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। राज्य में हर दिन औसतन 44 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही है, जो एक गंभीर चेतावनी है। सरकार ने राज्य में महामार्गों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया है और कई नए हाईवे प्रोजेक्ट भी शुरू किए जा रहे हैं। इससे यात्रा पहले की तुलना में आसान और तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ ही हादसों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले 15 महीनों में महाराष्ट्र में कुल 19,888 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खासकर पुणे, नाशिक, अहिल्यानगर, सोलापुर और सांगली के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं। साल 2026 के पहले तीन महीनों, यानी 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही राज्य में 46,000 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें से 18,447 दुर्घटनाएं गंभीर श्रेणी की थीं। सोलापुर जिला इस मामले में चौथे स्थान पर है, जहां सोलापुर-पुणे, सोलापुर-सांगली, सोलापुर-अक्कलकोट और सोलापुर-हैदराबाद हाईवे पर सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। जिलावार आंकड़ों की बात करें तो पुणे ग्रामीण क्षेत्र में 1,273 हादसे, नाशिक ग्रामीण में 1,117, अहिल्यानगर ग्रामीण में 1,068, सोलापुर ग्रामीण में 887 और सांगली ग्रामीण में 668 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की स्थिति ज्यादा खराब है। सरकार ने इन हादसों को रोकने के लिए जिलाधिकारी और वरिष्ठ सांसदों की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समितियों का गठन किया है। ये समितियां हर तीन महीने में बैठक कर स्थिति की समीक्षा करती हैं और आवश्यक उपायों पर चर्चा करती हैं। हालांकि, अब तक इन उपायों का कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। जानकारों का मानना है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल बेहतर सड़कें बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन, जागरूकता अभियान, बेहतर साइन बोर्ड और तेज रफ्तार पर नियंत्रण जैसे कदम उठाना भी जरूरी है। बहरहाल महाराष्ट्र में बढ़ते सड़क हादसे एक गंभीर समस्या बन चुके हैं, जिस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। हालांकि, सड़क सुरक्षा समितियां बनाई गई हैं और हर तीन महीने में बैठकें भी होती हैं, लेकिन इन उपायों का कोई खास असर नजर नहीं आ रहा। बढ़ते हादसों को देखते हुए अब सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। - ३० अप्रैल/२०२६/ईएमएस