- भोपाल मुख्यालय पहुंची सीएमओ कार्यशाला में गैरहाजिरी पर गुना सीएमओ को नोटिस, आयुक्त ने मांगा 2 दिन में जवाब बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी, प्रशासनिक हलकों में हलचल गुना (ईएमएस) ।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कार्य में लापरवाही के मामले में गुना नगर पालिका की प्रभारी सीएमओ एवं डिप्टी कलेक्टर मंजूषा खत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी किया गया, जिसमें भोपाल में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 एवं 17 अप्रैल 2026 को भोपाल स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान, भौरी में “शहरी नियोजन, विकास एवं सुधार” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी, लेकिन गुना की प्रभारी सीएमओ सुश्री मंजूषा खत्री इसमें शामिल नहीं हुईं। विभाग के अनुसार उन्होंने अनुपस्थिति के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति भी नहीं ली। आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यह आचरण शासकीय कर्तव्यों के प्रति उदासीनता, अनुशासनहीनता और आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया है। नोटिस में निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित अधिकारी 2 दिन के भीतर अपना स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं अधिकारी की होगी। सूत्रों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद सुश्री खत्री तत्काल भोपाल रवाना हो गईं, जिससे प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि आयुक्त संकेत भोंडवे को पूर्व में अशोकनगर कलेक्टर रहते हुए सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है, ऐसे में इस कार्रवाई को गंभीरता से देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि गुना नगरपालिका में डिप्टी कलेक्टर सुश्री मंजूषा खत्री के सीएमओ प्रभार संभालने के बाद से प्रशासनिक कार्यों में खींचतान की स्थिति बनी रही है। इस दौरान कई अनियमितताएं और कार्य में शिथिलता सामने आई हैं। सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब नगरपालिका की प्रमुख शाखाओं में प्रभारियों की अदला-बदली के फर्जी आदेश जारी होने का मामला उजागर हुआ। इस प्रकरण में स्वयं सीएमओ ने फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों को निलंबित किया था, लेकिन समयसीमा में ठोस कार्रवाई या आरोप पत्र प्रस्तुत न होने के कारण संबंधित कर्मचारियों की बहाली हो गई। नगरपालिका सूत्रों के अनुसार कई फाइलों में सीएमओ के हस्ताक्षर अलग-अलग शैली में पाए जाने की चर्चा भी सामने आई है, जो जांच का विषय है। वहीं, नगर पालिका में स्थायी सीएमओ के अभाव के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। -सीताराम नाटानी